
गांधी, नेहरू और शास्त्री की अस्थियां भी हुई है वागड़ प्रयाग में प्रवाहित, वाजपेयी का अस्थि कलश 25 को पहुंचेगा बेणेश्वर धाम
बांसवाड़ा. डूंगरपुर. सोम, माही का संगम स्थल बेणेश्वर धाम अगाध आस्थाओं के लिए विश्वभर में ख्याति लिए हुए हैं। लीलावतारी मावजी महाराज की अलौकिक अध्यात्मिक शक्तियों की वजह से यह स्थल जन-जन का परम आराधना स्थल है। यह तीर्थराज बेणेश्वर धाम एक बार फिर अखण्ड भारत के पटल पर छाया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की अस्थियों का कलश 25 अगस्त को बेणेश्वर धाम पहुंचेगा तथा यहां आबुदर्रा के घाट से राजनीतिक संत की अस्थियों को प्रवाहित किया जाएगा। वाजपेयी से पूर्व भी कई महानतम हस्तियों के अस्थि कलश बेणेश्वर धाम पहुंचे हैं। इनमें कई राजनीतिक एवं जानी मानी हस्तियां शामिल हैं।
महात्मा गांधी : भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख राजनीतिक एवं आध्यात्मिक नेता मोहनदास करमचंद गांधी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। पूरी दुनिया उन्हें महात्मा गांधी के नाम से जानती है। उनका निधन 30 जनवरी 1948 को हुआ, तो उनकी अस्थियां भी यहां लाई गई थी।
जवाहरलाल नेहरू : स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भारतीय राजनीति में केन्द्रीय व्यक्तित्व थे। महात्मा गांधी के संरक्षण में वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में नेता के रूप में उभरे। उनका निधन 27 मई 1964 को हुआ। उनकी अस्थियां भी बेणेश्वर संगम स्थल में विसर्जित की गई।
इंदिरा गांधी : वर्ष 1966 से 1977 तक लगातार तीन बार भारत की प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी की अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के चौथे चरण में 31 अक्टूबर 1984 को हत्या कर दी गई थी। भारत की एक मात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अस्थियां भी बेणेश्वर में विसर्जित की गई।
राजीव गांधी: इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को हुई थी। इस पर कांग्रेस कार्यकर्ता उनकी अस्थियों का कलश लेकर बेणेश्वर पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं ने विप्रों के निर्देशन में मंत्रोच्चारण के साथ अस्थियां विसर्जित की।
राजसिंह डूंगरपुर : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष राजसिंह डूंगरपुर ने सोलह वर्ष तक प्रथम श्रेणी का क्रिकेट खेला और करीब 20 वर्ष तक क्रिकेट बोर्ड से जुड़े रहे। उनका निधन 12 सितम्बर 2009 को हुआ। इसके बाद राजपरिवार एवं क्रिकेट प्रेमियों ने उनकी अस्थियों का कलश बेणेश्वर धाम में विसर्जित किया।
लालबहादुर शास्त्री : 09 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रुप में लालबहादुर शास्त्री का कार्यकाल आज भी याद किया जाता है। जय जवान-जय किसान का नारा देने वाले शास्त्री की ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयुब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी 1966 की रात्रि में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। उनकी अस्थियों को भी तत्कालीन राजनीतिज्ञ एवं परिवारजन यहां लेकर पहुंचे थे।
जयप्रकाश नारायण : सत्तर के दशक में चर्चा में आए जयप्रकाश नारायण राजनीति का जाना-पहचाना नाम है। वर्ष 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। इंदिरा गांधी को पदच्युत करने के लिए उन्होंने ‘सम्पूर्ण क्रांति’ नामक अंादोलन चलाया। उन्हें लोक नायक के नाम से भी जाना जाता है। आठ अक्टूबर 1979 को उनके निधन के बाद अस्थियों को कलश यहां पहुंचा था।
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक, प्रसिद्ध लेखक, विचारक एवं चिंतक श्रद्धेय कर्पूरचंदजी कुलिश के देहावसान के बाद उनकी भी अस्थियां का पावन कलश बेणेश्वर धाम लाया गया था। यह कलश उदयपुर से होता हुए डूंगरपुर पहुंचा। यहां डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी सभाभवन में श्रद्धाजंलि कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में लोग अस्थि कलश यात्रा के साथ बेणेश्वर पहुंचे थे और यहां विधान पूर्वक अस्थियों का विसर्जन किया गया था।
Published on:
24 Aug 2018 01:40 pm
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