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Video : बांसवाड़ा में मार्बल इंडस्ट्री पर मंडराया ‘GST’ का साया, हो सकती है बंद, हजारों श्रमिकों पर रोजगार का संकट

पांच से सीधे 28 फीसदी टैक्स से मार्बल व्यवसाय पर पड़ेगा असर, बांसवाड़ा में श्रमिकों सहित छोटे-बड़े हजारों उद्यमी होंगे प्रभावित

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Video: Housed in Marble Industry in Banswara, unde

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धरती की कोख से निकलने वाला मार्बल अब और महंगा होगा। अपने सपनों के आशियाने में फर्श और दीवारों पर चमचमाता मार्बल लगाना अब हर किसी के बूते की बात नहीं रहेगी। प्रदेश सहित देश भर में एक जुलाई से लागू हो रहा गुड्स एवं सर्विस टैक्स [जीएसटी] ने मार्बल चमक फीकी पडऩा तय है।

मार्बल पर अब 28 फीसदी टैक्स लगेगा। इससे पूर्व यह दर पांच फीसदी थी। एक साथ पांच गुना कर बढऩे से आम लोगों पर असर पड़ेगा। वहीं,छोटे-बड़े उद्यमियों, हजारों श्रमिकों की आजीविका पर भी असर पड़े बिना नहीं रहेगा।

पहले और अब

कुछ वर्ष पूर्व तक मार्बल पर 14 प्रतिशत टैक्स बतौर वेट के रूप में लिया जा रहा था। मौजूदा सरकार ने इस दर को घटाकर पांच प्रतिशत किया। इससे दम तोड़ते मार्बल व्यवसाय को ऑक्सीजन मिली और व्यापार ठीक-ठाक गति से आगे बढ़ ही रहा था कि केन्द्र सरकार ने एक बार फिर जीएसटी में मार्बल टैक्स की दर बढ़ाते हुए 28 प्रतिशत कर दीहै।

यूं समझें इतनी कटेगी जेब अधिक

- मार्बल टाइल्स अब तक 10 से 20 रुपए प्रति स्क्वायर फीट मिल रही है। इस पर 05 फीसदी टैक्स अर्थात करीब 75 पैसा लग रहा है। पर, नई दरों के मुताबिक अब यह सीधे 3.50 रुपए होगा।
- मार्बल स्लेब अब तक 20 से 70 रुपए प्रति स्क्वायर फीट मिल रहा है। इस पर फिलहाल 1.10 रुपए प्रति स्क्वायर फीट कर लग रहा था। पर, अब यह बढ़कर 10 से 15 रुपए होगी।

आम उपभोक्ता पर असर

टैक्स स्लेब बढऩे का सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। गृह-निर्माण का बजट पांच से सात गुणा बढ़ेगा। मार्बल अधिक महंगा होने से आम लोग मुंह मोड़ेंगे और टाइल्स या अन्य विकल्प तलाशेंगे।

टाइल्स की टैंशन पहले से ही


मार्बल्स को विक्ट्रीफाइड कम्प्यूटराईज्ड टाइल्स पहले ही टक्कर दे रही है। व्यापारियों कहते है कि मार्बल स्लेब कटिंग के दौरान आधा माल छोटी टाइल्स के रूप में निकलता है। बाजार में उपलब्ध टाइल्स फीटिंग-फिनिशिंग में मार्बल टाइल्स से काफी बेहतर होती है और दाम भी आसपास ही है। इन सब के चलते मार्बल टाइल्स की बिक्री नहीं के बराबर आंकी जाती है। ऐेसे में जीएसटी के बाद स्लेब के दाम और बढ़ेंगे। मार्बल लोगों की पहुंच से दूर होगा। इससे यह उद्यम आने वाले वर्षों में बहुत कम हो जाएगा।

- जिले में हैं कुल खदानें : 50
- छोटे- मोटे व्यवसायी : 400
- मार्बल व्यवसाय से जुड़े हैं श्रमिक : 10 हजार
- मार्बल गेंगसा है : 20
- जिले में है निवेश : 500 करोड़
- सालाना टर्न ओवर : 600 से 700 करोड़
- 500 से अधिक ट्रेक्टर और 300 डम्पर है कार्यरत

मार्बल उद्यम प्रदेश की नजर में

- प्रदेश के 33 में से 20 जिलों में होता है मार्बल का खनन एवं उत्पादन
- प्रदेश में मार्बल व्यवसाय में है कुल निवेश 50 हजार करोड़ रुपए
- मार्बल व्यवसाय से प्रदेश में 20 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका प्रत्यक्ष रुप से जुड़ी हुई है।

तुरंत दें राहत

. प्रदेश का मार्बल उद्यम ऐसे ही ऑक्सीजन पर है। यहां मार्बल की इतनी अधिक बिक्री नहीं होती है। टैक्स की दर इतनी अधिक बढ़ाने से यह उद्यम खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगा। सरकार को तुरंत राहत देनी होगी।

किशनसिंह तंवर, अध्यक्ष, बांसवाड़ा मार्बल एसोसिएशन

आजीविका होगी खत्म


मार्बल उद्यम से अकेले बांसवाड़ा में ही दस हजार निर्धनतम लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। टैक्स की दरों को कम नहीं किया, तो मार्बल की बिक्री नहीं के बराबर हो जाएगी। साथ ही इंस्पेक्टरराज बढ़ेगा।

मनोज अग्रवाल, सचिव, बांसवाड़ा मार्बल एसोसिएशन

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