
जलसंकट : पानी की तलाश में भटकते दर बदर, खाली मटका देखकर आंखें जाती भर
जलसंकट : पानी की तलाश में भटकते दर बदर, खाली मटका देखकर आंखें जाती भर
आमलीपाड़ा गांव के बाशिंदों की व्यथा, दो सौ परिवार, बूंद-बूंद को लाचार
बांसवाड़ा. सज्जनगढ़. आमलीपाड़ा गांव में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है। लोग बेबस है और प्रशासन लापरवाह। गांव में पानी की पीड़ा इतनी गहरी है कि परिंडा खाली देख लोगों की आंखें भर आती है। जिंदगी पानी की चिंता में बीत रही है। गांव में करीब 200 परिवार हैं। यहां एक कुआं और तीन हैंडपम्प है। ग्रामीणों ने बताया कि कुएं सूखने के कगार पर है। 3 महीने पहले खोदा गया हैडपम्प भी पानी की जगह हवा फेंक रहा है। लोगों को भीषण गर्मी में कोसों पैदल चलकर पानी का जुगाड़ करना पड़ रहा है।
गांव के आधे परिवार एक एक मटकी पानी को तरस गए हैं। पंचायत प्रशसान को टैंकरों की व्यवस्था की गुहार लगाई लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। गांव के वार्ड 1 के लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। गांव के दूसरे हिस्से के लोग एक कुएं पर निर्भर है। कुएं करीब सौ से डेढ़ फीट तक गहरा गए हैं। कुछ कुओं का पानी तो पीने योग्य भी नहीं है। सफाई व देखरेख के अभाव में कुओं में गंदगी और कचरे की भरमार है। एेसे में बीमारियां फैलने का अंदेशा है।
बांध का पानी भी नसीब नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि 35 साल पहले बड़े बांध का निर्माण होने पर घर-घर पानी पहुंचाने के लिए नहरें भी बनाई गई। लेकिन सज्जनगढ़ क्षेत्र में आज दिन तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई है। बांध से सज्जनगढ़ क्षेत्र के अलावा अन्य जगहों पर आपूर्ति हो रही है। ग्रामीणों ने गांव में टैंकरों की व्यवस्था जल्द करने व कुओं की साफ सफाई कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि पानी के अभाव में पशुधन भी प्यासा भटक रहा है। विभाग भी समस्या के प्रति गम्भीर नहीं है।

Published on:
21 May 2018 01:10 pm
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