
बांसवाड़ा. देश के सबसे बड़े सदन ने बीते दिनों महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में अपनी सहमति दी। इससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। वहीं राजस्थान में आदिवासी अंचल के बांसवाड़ा ने आजादी के बाद ही नारी वंदन की शुरुआत कर दी थी। 1953 में विधानसभा में पहुंचकर यशोदा देवी ने इतिहास रच दिया था। राजस्थान के गठन के बाद राज्य विधानसभा के पहले चुनाव 1952 में हुए। मुख्य चुनाव में चार महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, किंतु एक भी महिला प्रतिनिधि निर्वाचित नहीं हुई। बांसवाड़ा सामान्य सीट से वेलजी समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी से विधायक बने, किंतु उनका चुनाव अवैध घोषित होने पर 1953 में उपचुनाव हुआ।
इसमें प्रजा समाजवादी पार्टी से यशोदा देवी ने विजयी होकर राज्य की प्रथम महिला विधायक बनने का कीर्तिमान रचा। उप चुनाव में यशोदा देवी को 14 हजार 862 मत मिले। इनके प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस के नटवरलाल को 8 हजार 451 वोट मिले। यशोदा देवी ने 6 हजार 411 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
मध्यप्रदेश में जन्म
यशोदा देवी का जन्म मध्यप्रदेश के उज्जैन के भैंसोला गांव में 2 अक्टूबर 1927 को हुआ था। उनके बाल्यकाल में परिवार नागदा आकर बस गया। कुछ समय बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री उन्हें जयपुर ले गए। उनकी पत्नी रतन शास्त्री सैलाना की थी। उनके साथ पारिवारिक संबंधों के कारण वे यशोदा देवी को शिक्षा के लिए जयपुर ले गए। जहां उन्होंने वनस्थली विद्यापीठ में 1943 में मैट्रिक उत्तीर्ण की। इसके बाद उनका जीवन समाज को समर्पित हो गया।
मात्र तीन महिला विधायक
बांसवाड़ा जिले में विधानसभा की पांच सीटें हैं। 1952 से अब तक तीन महिला विधायक निर्वाचित हुई हैं। यशोदा देवी के अतिरिक्त 2008 में गढ़ी सीट से कांता भील और 2018 में रमिला खड़िया ने कुशलगढ़ से विधानसभा चुनाव जीता।
मैट्रिक उत्तीर्ण के बाद वे मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात राज्यों में आजादी का बिगुल बजाकर जन जागरण का बिगुल बजाने वाले मामा बालेश्वर दयाल की कर्मस्थली बामनिया आश्रम आ गईं और समाज सेवा में जुट गईं। मामाजी के संरक्षण में राजनीतिक जीवन को सेवा के रूप को आत्मसात किया। शराब बंदी, लगान बंदी व महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करती रहीं।
1950 में मामाजी ने कुशलगढ़ के निकट पणदा गांव में एक स्कूल खोलकर अनाथ बच्चों के पठन-पाठन का दायित्व विद्यालय संचालिका के रुप में यशोदा देवी को सौंप दिया। इसके बाद पहले चुनाव हुए। जब इसे अवैध घोषित किया तो यशोदा देवी ने उपचुनाव लड़ा और विजयी होकर एक ऐसा इतिहास रचा, जो सात दशक से वागड़ को गौरव की अनुभूति कराता आ रहा है। विधायक बनने के बाद उन्हें 1956 में सभापति तालिका सदस्य बनाया गया। वे विशेषाधिकार समिति की सदस्य भी रहीं। अप्रेल 2003 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने उन्हें आदर्श नारी के अलंकरण से विभूषित किया था। 3 जनवरी 2004 को उनका निधन हुआ।
Published on:
09 Oct 2023 12:35 pm
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