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आयतुल्लाह खुमैनी का बाराबंकी से नाता, किंतूर गांव में आज भी रहते हैं परिवार के सदस्य

सैय्यद अहमद मूसवी के पुत्र आयतुल्लाह मुस्तफा हिंदी का नाम इस्लामी धर्मशास्त्र के जाने-माने जानकारों में शुमार हुआ।

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आयतुल्लाह खुमैनी का बाराबंकी से नाता, किंतूर गांम में आज भी रहते हैं परिवार के सदस्य

बाराबंकी. कहा जाता है कि आयतुल्लाह खुमैनी के पूर्वज यूपी के बाराबंकी से रहे हैं। इनके दादा सैय्यद अहमद मूसवी हिंदी सन 1790 में बाराबंकी के इसी छोटे से गांव किन्तूर में ही जन्मे थे। वह अवध के नवाब के साथ धर्मयात्रा पर ईरान गए हुए थे। उन्हें ईरान इतना पसंद आया कि वो वहीं खुमैन गांव में बस गए। इनके पिता भी धार्मिक नेता थे। उन्होंने फिर भी अपना उपनाम हिंदी ही रखा गया है।

सैय्यद अहमद मूसवी के पुत्र आयतुल्लाह मुस्तफा हिंदी का नाम इस्लामी धर्मशास्त्र के जाने-माने जानकारों में शुमार हुआ। उनके दो बेटों में छोटे बेटे रूहुल्लाह का जन्म सन 1902 में हुआ, जो आगे चलकर आयतुल्लाह खुमैनी या इमाम खुमैनी के रूप में प्रसिद्ध हुए।

आयतुल्लाह खुमैनी के परिवार के सैय्यद निहाल अहमद काजमी ने बताया कि मैं उनके खानदान से हूं। अंग्रेजी हुकूमत से तंग आकर वह 1830 में ईराक माइग्रेट कर गए थे। हम लोग उन्हें अपना पूर्वज मानते हैं और उनकी राह पर चलना चाहते हैं। हम भी जियारत के लिए ईरान जाते हैं और वहां जाकर हमें खुशी मिलती है। सैय्यद निहाल अहमद काजमी के बेटे ने बताया कि हम लोगों को ईरान जाकर रुहानी खुशी मिली, क्योंकि हमारे पूर्वजों ने ईरान को एक गणराज्य बनाया। क्योंकि वह किंतूर से संबंध रखते हैं और हम भी यहां के निवासी हैं।