
वित्त एवं लेखाधिकारी का अड़ियल रवैया, फंसी मध्याह्न भोजन के लिए करोड़ों की ग्रांट
बाराबंकी. जिले का बेसिक शिक्षा विभाग अभी मिड-डे मील घोटाले की आंच से पूरी तरह उभर भी नहीं पाया था कि उससे पहले एक नई समस्या खड़ी हो गई है। दरअसल वित्त एवं लेखाधिकारी के अड़ियल रवैये के चलते बेसिक शिक्षा विभाग अपने स्कूलों के लिए आई करोड़ों की धनराशि का परिवर्तन लागत, रसोइंया मानदेय, खाद्यान्न मूल्य, परिवहन व्यय और फल मद में खर्च नहीं कर पा रहा है। क्योंकि वित्त एवं लेखाधिकारी की तरफ से इस राशि का स्कूलवार ट्रांजैक्शन नहीं किया जा रहा। इस मामले में बाराबंकी के जिलाधिकारी ने भी धनराशि के ट्रांजैक्शन करने को लेकर निर्देश दिए हैं। लेकिन उनकी तरफ से अब तक यह धनराशि भेजी नहीं जा रही। जिसके चलते आने वाले दिनों में स्कूलों में मध्याहन भोजन से लेकर तमाम समास्याएं खड़ी होने लगेंगी। आपको बता दें कि बीते दिनों बाराबंकी के बेसिक शिक्षा विभाग में मिड डे मील में काफी बड़ा घोटाला हुआ था, जिस संबंध में कई लोग जेल की हवा खा रहे हैं।
वित्त एवं लेखाधिकारी का अड़ियल रवैया
बाराबंकी के बीएसए वीपी सिंह ने बताया कि हमारे विभाग में मध्याह्न भोजन के अंतर्गत जो धनराशि जिलाधिकारी के निवर्तन पर आती है, वह नहीं आ पा रही है। जिसके चलते आने वाले दिनों में स्कूलों में मध्याहन भोजन से लेकर तमाम समास्याएं खड़ी होने लगेंगी। बीएसए ने बताया कि हमें परिवर्तन लागत, रसोइंया मानदेय, खाद्यान्न मूल्य, परिवहन व्यय और फल मद में करीब साढ़े 15 करोड़ के आसपास की प्रशासन से ग्रांट मिली है। जिसका ट्रांजैक्शन होना था। इसी को लेकर मेरे द्वारा सारे खंड शिक्षाधिकारियों से स्कूलवार कितना किस विद्यालय को जाना है, उसका सत्यापन कराते हुए सारी जानकारी इकट्ठा की गई और जिलाधिकारी की अनुमति से विद्यालय में ट्रांजैक्शन के लिए दे दी गई है। लेकिन जब यह फाइल यह फाइल बेसिक शिक्षा विभाग की वित्त एवं लेखाधिकारी मधु शर्मा के पास भिजवाई गई तो उन्होंने उसे लेने से मना कर दिया और फाइल वापस कर दी। इसके पीछे उन्होंने कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया। जबकि उन्हें जनकारी का मिलान करके पैसों का ट्रांजैक्शन करना चाहिए। जिससे विद्यालयों के खातों में पैसा पहुंच सके। बीएसए ने बताया कि यह मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में भी है। इसके अलावा मैंने मध्याहन भोजन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिरकारियों को भी इस बारे में जानकारी दे दी है। वीपी सिंह के मुताबिक जनवरी से हम लोग स्कूलों में पैसा नहीं भेज पाए हैं और वित्तीय वर्ष भी समाप्त होने वाला है। अगर समय रहते यह ग्रांट नहीं मिलती है तो इससे स्कूल में बच्चों के मध्याहन भोजन से लेकर तमाम चीजों में दिक्कतें सामने आने लगेंगी।
Updated on:
21 Mar 2019 08:19 am
Published on:
20 Mar 2019 02:09 pm
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