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हे भगवान! कोरोना काल में मरीजों की जान से खिलावड़ कर रहे ये छोलाछाप डाक्टर, कोरोना का भी कर रहे इलाज

ठेलिया और तखत पर मरीज, दीवरों पर टंगा ग्लूकोज, कोविड पेशेंट के लिए ऑक्सीजन का भी पूरा जुगाड़, झोलाछाप डाक्टरों (Untrained Doctor) का कुछ ऐसा ही कारनामा बाराबंकी जिले से सामने आया है।

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हे भगवान! कोरोना काल में मरीजों की जान से खिलावड़ कर रहे ये छोलाछाप डाक्टर, कोरोना का भी कर रहे इलाज

हे भगवान! कोरोना काल में मरीजों की जान से खिलावड़ कर रहे ये छोलाछाप डाक्टर, कोरोना का भी कर रहे इलाज

बाराबंकी. उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर न होने के चलते लोग मजबूरी में अपना इलाज बिना डिग्रीधारी डॉक्टरों से करा रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा खराब स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की बनी हुई है। कुछ ऐसा ही हाल राजधानी लखनऊ से जुड़े बाराबंकी जिले का भी है। कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के चलते बाराबंकी के जिला अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी और शहर के लगभग सभी प्राइवेट डाक्टरों की ओपीडी बंद चल रही हैं। ऐसे में लोग मजबूरी में बिना डिग्री वाले छोलाछाप डाक्टरों (Untrained Doctor) के पास जाकर इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। जिसके चलते अक्सर लोग कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना भी भूल जाते हैं और तो और कोरोना के लक्षण होने के बाद भी क्लीनिक संचालक और झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह नहीं दे रहे हैं। और खुद ही इलाज करने में लगे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि कोरोना संदिग्ध मरीजों का अगर ऐसे ही प्राइवेट क्लीनिकों पर इलाज चलता रहा तो कोरोना संक्रमण की चेन कैसे टूटेगी, बल्कि इससे तो कोरोना और फैलने का खतरा भी बना हुआ है।

छोलाछाप डाक्टर बढ़ा रहे मुसीबत

कुछ ऐसा ही नजारा दिखा बाराबंकी जिले की फतेहपुर तहसील के रीवी सीवा गांव और देवा के छपरा समेत जिले के कई जगहों पर देखने को मिल रहा है। जहां बिना डिग्री के डाक्टरों के यहां इन दिनों मरीजों का हुजूम उमड़ पड़ा है। यहां कोई मरीज ठेलिया पर नजर आ रहा है, तो कोई तखत पर लिटाया गया है। किसी को दीवार पर टांगकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है, तो कोविड मरीजों के लिए ऑक्सीजन का भी जुगाड़ इन डाक्टरों ने कर रखा है। कुछ ऐसा ही हाल बाराबंकी जिले के लगभग सभी ग्रमीण इलाकों का है। जहां कोरोना काल के चलते इनकी चांदी हो गई है। शहर में संचालित छोटी-छोटी क्लीनिकों के साथ गांव झोलाछाप डॉक्टरों के यहां सैकड़ों मरीजों की भीड़ लग रही है। कई केसों में तो यह भी देखा गया कि कोरोना के लक्षण होने के बाद भी क्लीनिक संचालक और झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह नहीं दे रहे हैं। और खुद ही इलाज करने में लगे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि कोरोना संदिग्ध मरीजों का अगर ऐसे ही प्राइवेट क्लीनिकों पर इलाज चलता रहा तो कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ना चुनौती बन जाएगा। क्योंकि सैकड़ों की भीड़ में कुछ मरीज कोरोना पॉजिटिव भी हो सकते हैं। ऐसे में अगर भीड़ में वह सामान्य मरीजों के संपर्क में आएंगे तो उनके भी संक्रमित होने का खतरा है।

शहरों में नहीं मिल रहे डाक्टर

क्लीनिक पर आये कई मरीजों ने बताया कि उन्हें सर्दी-जुकाम और उल्टी-दस्त जैसी शिकायत थी, तो वह डाक्टर के पास दिखाने आये हैं। मरीजों ने बताया कि डाक्टर नहीं मिल रहे, जिसके चलते हमें इतनी दूर इलाज कराने आना पड़ रहा है। वहीं क्लीनिक पर मौजूद डाक्टर बलराम रावत और डाक्टर शैलेंद्र ने बताया कि उनके पास जुखाम-बुखार और उल्टी-दस्त जैसे मर्ज के मरीज आते हैं और वह उनका इलाज करते हैं। उनका कहना है कि उनके पास जो भी मरीज आते हैं उन्हें फायदा भी मिलता है।

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