
प्रशासन ने किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों जैसे मल्चर, रोटावेटर, कटर आदि के उपयोग के लिए प्रेरित किया।
तहसीलदार के नेतृत्व में गठित टीम ने की कार्रवाई
कस्बाथाना. शाहाबाद तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव गटरेदा एवं खांडा सहरोल में गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। राजस्थान पत्रिका ने 13 अप्रैल को इसको लेकर खबर प्रकाशित की थी। जिला कलक्टर रोहिताश्व ङ्क्षसह तोमर के निर्देशानुसार शाहाबाद तहसीलदार राहुल कलोरिया के नेतृत्व में गठित संयुक्त निरीक्षण दल ने खेतों में गेहूं की पराली जलाते पाए गए 10 किसानों पर प्रति व्यक्ति 5,000 रुपए का जुर्माना लगाते हुए उन्हें भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी। संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पराली जलाने की घटनाओं की पुष्टि की और साक्ष्य एकत्र किए। इसके आधार पर नियमानुसार जुर्माना लगाया गया और संबंधित किसानों को आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। टीम में कृषि विभाग, राजस्व विभाग, और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी शामिल थे।
कृषकों से की समझाइश
इस दौरान किसानों को पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताया गया। टीम ने समझाया कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरकता भी घटती है और स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ता है। प्रशासन ने किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों जैसे मल्चर, रोटावेटर, कटर आदि के उपयोग के लिए प्रेरित किया। प्रशासन ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं और पर्यावरण की सुरक्षा में प्रशासन का सहयोग करें। राज्य सरकार पराली प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, दनका लाभ उठाकर किसान जिम्मेदारी के साथ कृषि कार्य करें।
सख्त कार्रवाई करने की दी चेतावनी
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि पराली जलाने की घटनाओं पर भविष्य में और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाएगी और दोषियों पर जुर्माने के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
15 Apr 2025 01:43 pm
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