20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अमरीका, स्विट्जरलैंड तक पहुंची बारां की मूर्तियां

बीते वर्षों में जिले के कई पुरास्थल मूर्ति तस्करों की निगाहों में रहे।

2 min read
Google source verification
अमरीका, स्विट्जरलैंड तक पहुंची बारां की मूर्तियां

tourist

गिनती के पुरास्थलों पर ही सुरक्षाकर्मी तैनात
बारां. पुरासंपदा के मामले में बारां जिला जितना समृद्ध है, सुरक्षा इंतजामों के मामले में उतनी ही तंगी है। बीते वर्षों में जिले के कई पुरास्थल मूर्ति तस्करों की निगाहों में रहे। जिले से मूर्तियां चोरी कर बाहर भेजी गई, ऐसी घटनाओं के बावजूद सबक नहीं लिया गया। अभी भी कई पुरास्थलों पर सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है। कुछेक जगह होमगार्ड के जवान लगा रखे हैं जो भी ऊंट के मुंह में जीरा बराबर हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग व राज्य पुरातत्व विभाग के अधीन जिले के संरक्षित स्थल हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन विलासगढ़ (कृष्ण विलास) व गडग़च (अटरू) स्थलों पर तो कुछ सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, लेकिन राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्थलों में से दो-चार को छोड़कर कहीं सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं है।
हमारे यहां की मूर्तियां तस्करों के माध्यम से भले ही विदेशों में पहुंच गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस बहुमूल्य पुरासम्पदा की कद्र नहीं हो रही। भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन अटरू का गडग़च मंदिर पुरासम्पदा से जितना समृद्ध है, तस्करों की निगाह भी इस पर उतनी ही रही। दो दशक से अधिक समय पहले गणेश मंदिर (गडग़च समूह का एक स्मारक) के सभा मंडप से चोरी गई वराह अवतार की एक प्रतिमा कुछ वर्षांे पहले स्विट्जरलैंड में मिली थी वहीं करीब सात वर्ष पहले गडग़च मंदिर से चोरी गई विष्णु-लक्ष्मी की एक प्रतिमा अमेरिका में मिली। इस घटना से पहले गणेश मंदिर के पीछे रखी अष्टभुजा गणेश प्रतिमा भी चुराई गई थी। इस प्रतिमा को बाद में बरामद कर लिया गया था।
भारतीय पुरातत्व विभाग के पुरास्थलों पर तो कुछ सुरक्षाकर्मी तैनात हैं लेकिन राज्य पुरातत्व विभाग के इक्के-दुक्के पुरास्थलों के अलावा कहीं सुरक्षा बंदोबस्त नहीं है।
काकोनी भी रहा तस्करों के निशाने पर
हरनावदाशाहजी उपतहसील क्षेत्र में स्थित काकोनी पुरास्थल की सुरक्षा में भी सेंध लगाई गई। यहां से वर्ष १९९० एवं २००३ में कलात्मक मूर्तियां चोरी होने के प्रकरण पुलिस थाने में दर्ज हुए थे। इसमें तीन जनों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से दो जैन मूर्तियां व तीन मुंह वाली प्रतिमा बरामद की गई थी। २०११ में विलासगढ़ से ही शिव-पार्वती की प्रतिमा को एम्बुलेंस में रखकर करौली की ओर ले जाने का प्रयास किशनगंज पुलिस ने विफल कर दिया गया था।