
झांसी में टीचरों की रोकी गई वेतन।
Baran News : शिक्षा विभाग की ओर से विधानसभा चुनाव परिणाम जारी होने के बाद से प्रतिनियुक्ति समाप्त करने और विभिन्न कार्यालयों में लगे शिक्षकों को कार्यमुक्त कराकर वापस मूल पदस्थापन स्थान पर ड्यूटी ज्वॉइन करने के आदेश दिए जा रहे है, लेकिन विभाग अपनी ही सरकार को अंगूठा दिखा रहा है। शिक्षकों का प्रतिनियुक्ति से मोह खत्म नहीं हो रहा और अधिकारी बेपरवाही से आदेशों को हवा में उड़ा रहे है। यहां तक स्कूल शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी इस सम्बंध में सख्ती बरतने के संकेत दे चुके हैं। इसके बावजूद उनके अपने गृह जिले में ही कई शिक्षक प्रतिनियुक्ति का आनन्द ले रहे हैं। कुछ तो अरसे से स्कूल तक नहीं गए।
सूत्रों का कहना है कि जिले में अधिकारी स्तर के कार्मिक प्रधानाध्यापक से लेकर प्रबोधक स्तर के कर्मचारी विभिन्न कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति का मेवा खा रहे हैं। एक प्रधानाध्यापक तो लम्बे समय से विभागीय कार्यालय में सेवा दे रहे हैं। एक अध्यापक शाहाबाद से बारां शहर के एक स्कूल में प्रतिनियुक्ति पर डटे हुए हैं। कुछ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बाबू बने बैठे हैं तो कुछ सीबीईओ कार्यालय में लगे हुए हैं।
विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने ओर प्रदेश में सत्ता परिर्वतन होने के एक दिन बाद ही 4 दिसम्बर 2023 को शासन सचिव स्कूल शिक्षा, भाषा, पुस्तकालय, पंचायती राज (प्रारंभिक शिक्षा) विभाग की ओर से विधानसभा चुनाव की कार्यव्यवस्था के लिए कलेक्ट्रेट, एसडीओ अथवा अन्य कार्यालय व विद्यालयों में लगे अध्यापकों, कर्मचारियों को कार्यमुक्त करवाने को लेकर संभाग स्तरीय अधिकारियों को आदेश जारी किए थे। इसके बाद संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा कोटा की ओर से शासन सचिव के उक्त प्रासंगिक पत्र 2019-01061 दिनांक 04-12-2023 की अनुपालना में 20 दिसम्बर 2023 को संभाग के कोटा, बूंदी, बारां व झालावाड़ के शिक्षा अधिकारियों के नाम आदेश जारी किए। 25 जनवरी को निदेशक माशि बीकानेर और इनके आदेश की पालना में संयुक्त निदेशक कोटा ने 27 जनवरी को आदेश जारी किए।
एक फरवरी को खुद जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय (प्रा) ने नियाना स्कूल के एक अध्यापक (पीईईओ) को व्यवस्थार्थ कार्यालय में नियुक्त कर दिया। इससे पहले 10 जनवरी को आदेश जारी कर अटरू के महात्मा गांधी विद्यालय के एक अध्यापक को कार्य व्यवस्थार्थ कार्यालय में लगा दिया। जबकि उच्च स्तर से कोई भी कार्मिक व्यवस्थार्थ कार्यरत नहीं होने का प्रमाण-पत्र मांगा गया है। इसके अलावा विपरीत स्थिति के लिए भी संबंधित अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे। इसके बाद भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष दबाव के चलते बेपरवाही बरती जा रही है।
पूर्व में उच्च स्तर से जारी आदेशों की पालना में जिले में व्यवस्थार्थ प्रतिनियुक्ति पर लगे कार्मिकों को कार्यमुक्त कर दिया था, लेकिन कुछ रह गए ओर कुछ फिर लगाए गए थे, लेकिन आज सभी को कार्यमुक्त करने के आदेश जारी कर दिए।
पीयूष शर्मा, डीईओ (मा. प्रार.)
Published on:
07 Feb 2024 01:53 pm
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