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जेल की सलाखों में बंद कैदी यहां सरेआम दे रहे धमकिया

बंदियों के परिजनों को धमकी भरे फोन तो मिल रहे हैंं, लेकिन यह काम कोई ओर नहीं, जेल में बंद उनके अपने ही कर रहे हैं।

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जेल की सलाखों में बंद कैदी यहां सरेआम दे रहे धमकिया

baran jail

हकीम पठान
बारां. जिला कारागार में बंदियों की सुविधा के लिए लगाया गया एसटीडी फोन बूथ जेल प्रशासन के लिए सिरदर्द बन रहा है। इस फोन से बंदियों के परिजनों को धमकियां मिल रही है। बंदियों के परिजनों को धमकी भरे फोन तो मिल रहे हैंं, लेकिन यह काम कोई ओर नहीं, जेल में बंद उनके अपने ही कर रहे हैं। बंदी जेल में बंद होने के बावजूद अपने ही परिजनों को धमका रहे हैं। इससे जिला कारागार प्रशासन के अलावा बंदियों के परिजन भी सकते में आ रहे हैं। वर्तमान में जिला कारागार में क्षमता से दोगुनी संख्या में बंदी है। इससे बैरक फुल हो रहे हैं।
तीन माह में आधा दर्जन मामले
यहां जिला कारागार में मार्च माह के प्रथम पखवाड़े के दौरान कुछ अन्य जिलों के साथ एसटीडी बूथ की शुरूआत की गई थी। कुछ दिन पहले एक शिकायते पहुंची तो जेल प्रशासन ने परिजनों को धमकाने वाले के फोन नम्बर मांगे। इन नम्बरों की जांच की गई तथा मोबाइल में कॉल डिटेल देखी गई तो वह जेल के सरकारी एसटीडी बूथ के नम्बर निकले। इसके बाद जेल अधिकारियों ने राहत की सांस ली। परिजनों को भी समझाइश कर आश्वस्त किया। बीते करीब तीन माह के दौरान परिजनों को धमकाने, परेशान करने के करीब आधा दर्जन मामले सामने आ चुके है। लेकिन प्रकरण में शिकायतकर्ता के नम्बर ब्लॉक किए गए।
तनाव से राहत
सूत्रों का कहना है कि जेल विभाग की ओर से बंदियों की सुविधा तथा जेलों में मोबाइल फोन के अवैधानिक उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य को लेकर फोन सेवा की शुरूआत की गई है। हालांकि अधिकांश बंदी इसका बेहतर उपयोग कर रहे है। वह बच्चों, बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी आदि के हालचाल जान रहे हैं। ऐसे बंदियों को इससे खासी राहत मिल रही है। मुलाकत के लिए भीड़ कम हो गई है, परिजनों के आने जाने का खर्च व समय बच रहा है। कई बार अन्य बंदियों से संदेश भेजते थे। फोन सुविधा मिलने से बंदियों का तनाव कम हुआ।
& वैसे बंदियों को निर्धारित चार नम्बरों पर ही बात कराने की सुविधा है। परिजनों को जमानत कराने आदि को लेकर धमकाने के कुछ मामले आए है, लेकिन हाल ही में मुख्य रूप से एक शिकायत मिली थी, उसके बाद नम्बर ब्लॉक कर बंदी को उस नम्बर पर बात करने से रोक लगा दी है।
करण सिंह शक्तावत, जेलर, जिला कारागार
केस एक
जेल के फोन से बेटी को धमकी
यहां जिला जेल में पत्नी की हत्या के मामले में जेल में बंद एक विचाराधीन बंदी ने फोन कर उसकी पुत्री को ही जान से मारने की धमकी दे दी। पुलिस के मुताबिक पुत्री की सूचना पर ही पुलिस ने पत्नी की हत्या के आरोप में उसे गिरफ्तार किया था। बेटी को पिता ने धमकाया तो बेटी सकते में आ गई। घबराते हुए वह जेल प्रशासन के पास पहुंची।
केस दो
पिता को कहा जमानत तो कराओ
जिला कारागार में बंद एक अन्य विचाराधीन बंदी ने जेल के फोन से पिता से बात करते हुए पहले तो हाल चाल जाने बाद में जमानत कराने के लिए जोर दिया। उसने पिता को कहा कि जल्दी जमानत कराओ, वकील से मिलो। आए दिन की इसी तरह की बात होने से परेशान पिता ने जेल पहुंचकर शिकायत की।