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रीतने लगे जंगलों के जल भंडार

प्रदेश के सघन वन क्षेत्र वाले जिलों में शुमार बारां जिले के जंगलों के जल स्रोत अब जवाब देने लगे हैं। कई वाटर हॉल में पानी रीत गया है तो अधिकांश में पानी अब पैंदे में बैठने लगा है।

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रीतने लगे जंगलों के जल भंडार

बस्तियों में पेयजल ढूंढ़ रहे वन्यजीव
गर्मी का जोर बढऩे के साथ ही बढऱ वन्य जीवों की मुश्किल
बारां. प्रदेश के सघन वन क्षेत्र वाले जिलों में शुमार बारां जिले के जंगलों के जल स्रोत अब जवाब देने लगे हैं। कई वाटर हॉल में पानी रीत गया है तो अधिकांश में पानी अब पैंदे में बैठने लगा है। ऐसे में वन्य जीवों का प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, तो गर्मी के दिनों में जंगलों में जाने वाले पशुओं के लिए भी पेयजल संकट गहराने लगा है। वैसे में जिले के जंगलों के घनत्व में पिछले पांच बरसों से लगातार कमी आने से भी वन्य जीवों के लिए प्रतिकूल हालात बनने लगे हैं। सोमवार को जिला वन अधिकारी ने जिले के सभी क्षेत्रीय वन अधिकारियों की बैठक आहुत कर वन क्षेत्र की पेयजल स्थिति की समीक्षा की है। जिले में हरिण, सियार, कृष्ण मृग, भालू, चिंकारा, पैंथर, जरख, आदि शिड्यूल वन के वन्य जीवों के साथ बंदर, मोर व गिद्ध आदि भी यहां बहुतायात में हैं। पक्षियों की कई प्रजातियां भी जिलेभर में पाई जाती हैं।
भटकते यहां से वहां
हाल ही जिले के हरनावदाशाहजी क्षेत्र के जंगलों में पेयजल स्रोतों के रीतने की जानकारी सामने आने के बाद अब सोरसन वन क्षेत्र में हरिणों को उपलब्धता के अनुसार पेयजल अब कम हो गया है। यहां से हरिण पलायन कर अन्ता, बारां, अटरू व मांगरोल तहसील क्षेत्र में गांवों तक पहुंचने लगे हंै। वन विभाग सूत्रों के अनुसार सोरसन में अभी कुछ तलाइयों में पानी है।
टैंकरों से भराएंगे पानी
वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि जरूरत पडऩे पर टैंकरों से यहां पानी डलवाया जाएगा। जिले में वन क्षेत्रों के समीप के जलस्रोतों में किसानों द्वारा पशु पेयजल के लिए व्यवस्था कर लेने से भी संकट और भी गहरा जाता है। इससे भी वन्यजीवों की प्यास बुझने पर विपरीत असर पड़ता है तथा वन्यजीव आबादी क्षेत्र तक पहुंचते हंै।
हर साल चलते हैं टैंकर
वन विभाग सूत्रों के अनुसार गर्मी के दौरान पेयजल बंदोबस्त के लिए हर साल टैंकर चलाने पड़ते हैं। टैंकरों पर प्रति वर्ष दो से चार लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। बीते मानसून सत्र में जिले में अच्छी बारिश होने के बावजूद गर्मी की शुरुआत में पेयजल स्रोत रीतने लगे हैं। इसका प्रमुख कारण वन भूमि के साथ इससे सटी कृषि भूमि पर फसलों की सिंचाई के लिए वाटर हॉल का पानी किसान उपयोग में लाते हैं।
-दिए हैं निर्देश
वन्य जीवों के समक्ष जल संकट की स्थिति नहीं आए, इस बारे में सभी क्षेत्रीय वन अधिकारियों को बैठक मेंं विशेष निर्देश दिए हैं। आगामी १५ अप्रेल तक रीते जलस्रोतों में टैंकरों से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए बजट को लेकर कोई परेशानी नहीं होगी।
महेश गुप्ता, मंडल वन अधिकारी बारां