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हजारों लोग झोलाछाप के भरोसे

बरसों पूर्व जिस छोटे भवन में स्थायी व एक से बढक़र एक चिकित्सक मरीजों का उपचार करने के लिए रहते थे आज वह भवन बडा तो हो गया लेकिन यहां चिकित्सकों की संख्या घट गई। जहां हर समय महिला चिकित्सक की तैनाती से प्रसुताओं को प्रर्याप्त सुविधा मिलती थी

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baran

हजारों लोग झोलाछाप के भरोसे

आयुष महिला चिकित्सक के भरोसे प्रसुताएं

कम्पाउण्डरों के बलबूते चल रहा अस्पताल

किशनगंज. बरसों पूर्व जिस छोटे भवन में स्थायी व एक से बढक़र एक चिकित्सक मरीजों का उपचार करने के लिए रहते थे आज वह भवन बडा तो हो गया लेकिन यहां चिकित्सकों की संख्या घट गई। जहां हर समय महिला चिकित्सक की तैनाती से प्रसुताओं को प्रर्याप्त सुविधा मिलती थी, वहीं आज एक आयुष चिकित्सक व एएनएम के भरोसे प्रसुताएं प्रसव करवाती हंै। कस्बे व दूर दराज के गांवों से उपचार के लिए आने वाले लोगों का भी यही कहना है कि भवन चाहे छोटा ही रहता लेकिन चिकित्सकों की संख्या पहले की भांति पर्याप्त रहनी चाहिए थी। वास्तव में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस अस्पताल का भवन धीरे-धीरे मालूम नहीं कब विशालकाय हो गया। लेकिन भवन के प्रगति करने के साथ ही चिकित्सकों का टोटा भी शुरू हो गया। यहां स्थित सामूदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देखने में लगता है मानों हर बीमारी का इलाज यहां संभव है। विशाल भवन के साथ उपखण्ड मुख्यालय पर स्थित इस चिकित्सालय में संसाधनों समेत चिकित्सकों का हमेशा टोटा रहा है। मुख्यालय होने के नाते इससे सैकडों गांव जुडे हैं। दूर हालातों से बंगाली झोलाछापों को पनपने का अवसर मिल रहा है। दूर दराज के गांवों से इलाज कराने के लिए लोग यहां आते हैं। लेकिन यहां के पर्याप्त उपचार नहीं होने से लोग झोलोछापों का शिकार हो रहे हंै। यहां ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर तैनात चिकित्सकों को प्रतिनियुक्ति पर लगाकर मात्र जिम्मेदारी को पूरा किया जा रहा है। यह अस्पताल केवल एएनएम व कम्पाउण्डरों के भरोसे चलता है।

--एएनएम के भरोसे ही होते है प्रसव
किशनगंज चिकित्सालय के अधीन कुल 7 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं। बडा अस्पताल होने के कारण लगभग एक सौ पचास गांवों से अधिक गांवों के मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं। ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से प्रसुताओं को प्रसव के लिए भेजा जाता है लेकिन यहां भी प्रसव की जिम्मेंदारी केवल नर्सो के भरोसे है। मामला थोडा सा गम्भीर होने पर यहां तैनात आयुष महिला चिकित्सक को बुला लिया जाता है। ज्यादा गम्भीर होने पर फ ौरन बारां रैफर कर देते हंै। महिला चिकित्सक के अभाव में कई बार प्रसुताओं की मौत तक हो जाती है तो कई बार नवजात शिशुओं को जान गंवानी पडती है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ तथा शिशु रोग विशेषज्ञ के नहीं होने के कारण यहां के हालात खराब हंै। महिला चिकित्सक के अभाव में लेबर रूम की व्यवस्थाएं व संसधान चुस्त दुरूस्त नहंंीं है।
-- बदहाली का फायदा उठा रहे झोलाछाप
चिकित्सालय में चिकित्सकों व सुविधाओं के टोटे के चलते चिकित्सा व्यवस्थाएं बेपटरी हैं ओर इसी बेपटरी व्यवस्था का फायदा झोलाछाप चिकित्सक उठा रहे हैं। अस्पतालों में सुविधाओं व चिकित्सको की कमी से किशनगंज ब्लॉक क्षेत्र में करीब एक सौ पचास से अधिक झोलाछाप चिकित्सक सक्रिय होकर क्लिनिक चला रहे हैं। बिना किसी मेडिकल डिग्री के उपचार कर लोगों के जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं।
---एमटीसी केन्द्र में भर्ती शिशु एनएनएम के भरोसे
क्षेत्र बडे स्तर पर कुपोषण की चपेट में है। कुपोषण के इलाज के लिए सामूदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर एमटीसी में कुपोषित बच्चे भर्ती होते हैं। उनके इलाज के लिए यहां शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऐसे में यहां भर्ती शिशु मात्र एएनएम के भरोसे रहते हैं। थोडा मामला गम्भीर होते ही बारां रैफ र कर दिया जाता है। ऐसे में बीमार शिुशु के माता पिता की चिन्ता दोगुनी हो जाती है। शिशु रोग विशेषज्ञ के अभाव में नवजातों को बीमार होने पर बारां लेकर भागने की मजबूरी होती है।
भुगतना पडा खामियाजा
प्रसुताओं को महिला चिकित्सक की कमी खासी अखरती है। कई बार महिला चिकित्सक नहीं होने का खमियाजा प्रसुताओं को भुगतना पडता है। सुवास गांव निवासी अनिता प्रसव के लिए रेलावन स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर भर्ती हुई थी। उसे रेलावन पीएचसी से किशनगंज सीएचसी पर लाया गया। यहां 08 जून की रात्रि को अनिता के प्रसव के बाद नवजात के लो बर्थरेट होने के कारण शनिवार तडक़े 4.00 बजे जिला चिकित्सालय ले जाया गया। नवजात के साथ मां अनिता को भी साथ ले गए। अनिता को ब्लड की कमी के चलते ब्लड चढाया गया। बाद में तबीयत बिगडऩे से अनिता की मौत हो गई। अनिता जैसी प्रसुताओं की मौत महिला चिकित्सक की कमी को उजागर करती है।
यह है स्थिति
किशनगंज चिकित्सालय में डेंटिस्ट का पद स्वीकृत होने के बावजूद चेयर नहीं है। ऐसे में यहा कार्यरत डेन्टिस्ट भी पीजी करने निकल गए। चिकित्सालय में 7 चिकित्सकों के पद वर्तमान में रिक्त चल रहे है।

महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ 1 पद
सर्जन 1 पद
शिशु रोग विशेषज्ञ 1 पद
फिजिशियन 1 पद
सिनियर मेडिकल ऑफिसर 2 पद
डेंटिस्ट 1 पद