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चिंता का विषय : कार्यवाहक के भरोसे कैसे होगी विशाल जंगल की निगरानी

अतिक्रमण बढ़ रहे हैं और जंगल सिमट रहे हैं

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बारां

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Mukesh Gaur

Jun 11, 2022

चिंता का विषय : कार्यवाहक के भरोसे कैसे होगी विशाल जंगल की निगरानी

चिंता का विषय : कार्यवाहक के भरोसे कैसे होगी विशाल जंगल की निगरानी

जलवाड़ा. नाहरगढ़ रेंज अतिक्रमण के लिहाज से संवेदनशील होने के बाद भी वन विभाग की उदासीनता का तो क्या कहने। वन भूमि लगातार अतिक्रमणों की भेंट चढ़ती जा रही है। इस रेंज के अंतर्गत पांच नाके हैं। इसमें जलवाड़ा,नाहरगढ़, ढिकोनिया, किशनपुरा व सिमलोद शामिल हैं। दो दशक पूर्व तक रेंज के नाके घने जंगलों के रूप में विख्यात थे।

...तब सुरक्षित थे जंगल
सालों पहले यहां विभिन्न प्रजातियों के बेशकीमती सागवान, महुआ, धोकला, तेंदू, कोहड़ा, सीताफल सहित अन्य प्रजातियों के घने पेड़ थे। इसमें विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर रहते थे। ऐसे में तब यहां कोई अतिक्रमण करने के बारे में सोचता तक नहीं था। अब हर तरफ वनों का विनाश नजर आता है। लोगों ने वन भूमि पर बड़े-बड़े फार्म हाउस तक बना लिए हैं। इनपर नलकूपों सहित बिजली के कनेक्शन करवा लिए गए हैं। रेंज के पांच नाकों में एक दर्जन से अधिक बस्तियां बस गई हैं। यह बस्तियां आबादी में नहीं होने के बाद भी ग्राम पंचायत व सरकार की ओर से इन्हें हर सुविधा मिल रही है। बस्तियों में प्रधानमंत्री आवासों का बेरोकटोक निर्माण भी हो रहा है। नारगढ़ रेंज के अंतर्गत पांच नाके कार्यवाहक रेंजर के भरोसे है। बीते दो दशक में अधिकांश समय यह रेंज कार्यवाहक वन अधिकारी के भरोसे ही चलती रही है। अभी भी वनपाल दीपक कुमार गौतम को ही क्षेत्रीय वन अधिकारी बना रखा है। इस कारण भी नाकों के वनपाल सहित वनकर्मियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रह पाता है। वनकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद भी बिलासगढ़ वन क्षेत्र में एक अतिक्रमी ने इस वर्ष अस्सी बीघा से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण कर फसल की बुवाई कर पैदावार ले ली। इसी प्रकार किशनपुरा नाके में करीब तीस बीघा, ढिकोनिया नाके में करीब सौ बीघा वनभूमि पर अतिक्रमण कर फसलोत्पादन कर रहे हैं। अतिक्रमियों ने विभाग को किसी प्रकार का जुर्माना तक नहीं दिया है।

6000 बीघा वनभूमि पर अतिक्रमण
नारगढ़ रेंज के पांच नाकों के अंतर्गत अतिक्रमण करीब ढाई दशक में धीरे-धीरे कर वन भूमि के हजारों हरे भरे पेड़,पौधों को कुल्हाड़ी चलाकर नष्ट कर कर दिया। बड़े भूभाग पर अतिक्रमण है। ये अतिक्रमण 6000 बीघा से भी अधिक का है।

प्रकरण दर्ज नहीं
रेंज के जलवाड़ा, किशनपुरा, सिमलोद, नाहरगढ़ सहित ढिकोनिया नाके में सैंकड़ों बीघा वन भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। लेकिन विभाग के वन पालो ने अतिक्रमियों के विरुद्ध कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया है। परिणामस्वरूप कागजों में जंगल, धरातल पर फसलें है। जुर्माने के नाम पर कुछ नहीं। अतिक्रमी प्रति वर्ष बेरोकटोक लाखों की पैदावार करते हैं।

- जो अतिक्रमी वन भूमि पर अवैध काश्त कर रहे हैं। उनके विरुद्ध एलआरए 91 के तहत प्रकरण दर्ज करवाएंगे। उनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा। वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को भी रोकने की कार्रवाई की जाएगी।
वी चेतन कुमार, जिला वन मंडल अधिकारी, बारां