जलवाड़ा . नाका के वॉच टॉवर पर हमले के बाद फिर वन विभाग ने अतिरिक्त जाप्ता बढ़ा कर भारी लवाजमे के साथ शनिवार को फिर दबंग अतिक्रमियों की भूमि पर चार जेसीबी मशीन से खाइयां खोदी गई। इस दौरान जिला सहायक वन संरक्षक डॉ. अनिल कुमार मीणा के नेतृत्व में छबड़ा, छीपाबड़ौद, अटरू, किशनगंज, केलवाड़ा, नाहरगढ़ सहित शाहाबाद के 75 वनकर्मी, होम गार्ड जवान व 7 महिला वनकर्मी मौजूद थे। कार्रवाई से मीणा ने सभी वनकर्मियों को एकत्रित कर सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए। दिनभर जेसीबी मशीनों से करीब 40 बीघा वनभूमि पर खाई खोदने का काम चला। अतिक्रमियों ने वनभूमि पर दो नल कूप खुदवा रखे थे तथा पत्थर चार दीवारी कर रखी थी। वनकर्मियों ने जेसीबी से दोनों नलकूप व चारदीवारी को ध्वस्त कर दिया। वनकर्मियों पर हमला करने वाले दबंग अतिक्रमी व महिलाएं वन विभाग के भारी दस्ते को देख कर शनिवार को घरों से नदारद रहे। इन पर मामला दर्ज पुलिस ने वन विभाग वॉच टॉवर पर शुक्रवार को हमला व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हरिपुरा ओढ़ समाज की चालीस, पचास महिला व लोगों सहित बच्चों ने वॉच टॉवर की घेराबंदी कर 13 वाहनो में तोड़,फोड़ कर दी तथा वॉच टॉवर का गेट व जंगले भी क्षतिग्रस्त कर दिए। पुलिस ने अमर लाल, सुंदर लाल, नेमी चंद पुत्र अमर लाल,भूरा लाल, किशन लाल, रतन लाल, नेमी चंद पुत्र गोपाल, श्याम लाल, गीता बाई, बिना बाई, प्रहलाद, पप्पू सहित चालीस, पचास अन्य के विरुद्ध राज कार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति को नुकसान, जाति ***** शब्दो से अपमानित करने पर एससी, एसटी की धारा 3 सहित अन्य धाराओं में पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया। जांच शाहाबाद के पुलिस उपाधीक्षक हेमन्त गौतम करेंगे।
इधर, देवरी में सैंकड़ों हरे पेड़ काटे, ग्रामीणों में आक्रोश देवरी. जिले के शाहाबाद उपखंड में बरसात के दौरान हर वर्ष हजारों बीघा वनभूमि पर अतिक्रमियों द्वारा कई हरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। विभाग कार्रवाई करेंगे कह कर खानापूर्ति कर लेता है। ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण अतिक्रमण के हौसले बुलंद हैं। हाल ही में मप्र की सीमा से सटे संदोकड़ा ग्राम पंचायत के मुसरेडी नुकर्रा गांव के पास सैकड़ों हरे पेड़ों को काटकर खेती योग्य जमीन बना ली गई है। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और वन विभाग को सूचना दी। जब तक वन विभाग की टीम पहुंचती, तब तक ग्रामीणों ने सैकड़ों बीघा वनभूमि पर लगी तार फेंङ्क्षसग को उखाड़ फेंका था। मौके पर पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि यह जंगल मध्यप्रदेश के गुना जिले की सीमा से सटा होने के चलते यहां जिम्मेदारों का आना-जाना कम रहता है। इसका फायदा उठाकर अतिक्रमी हर वर्ष यहां हरे पेड़ों की कटाई करके वनभूमि को उपज योग बना रहे हैं। शुरुआत में करीब 10 बीघा वन भूमि पर कटाई की गई थी। अब हर साल सैकड़ों पेड़ों की कटाई करके जंगल को नष्ट किया जा रहा है। सैकड़ों बीघा वन भूमि पर भी अतिक्रमण कर लिया गया है।