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जब धनिया था भरपूर तब मसाला उत्पादन में बारां था मशहूर

कृषि में नवाचार के प्रति किसान दिखा रहे रुचि...,-मेथी, मिर्च कलोंजी आदि मसाला फसलों का होता है उत्पादनबारां. जब जिले के किसान धनिये की फसल को लेकर खासी रुचि दिखाते थे, तब बारां जिला मसाला फसलों के उत्पादन में प्रदेश में टॉप जिलों में शुमार था। अब यह नीचे खिसक गया है।

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जब धनिया था भरपूर तब मसाला उत्पादन में बारां था मशहूर

जब धनिया था भरपूर तब मसाला उत्पादन में बारां था मशहूर

बारां. जब जिले के किसान धनिये की फसल को लेकर खासी रुचि दिखाते थे, तब बारां जिला मसाला फसलों के उत्पादन में प्रदेश में टॉप जिलों में शुमार था। अब यह नीचे खिसक गया है। इसका प्रमुख कारण जिले के किसानों का धनिये के प्रति लगातार रुझान कम होना व मौसम की मार है। एक जमाना था जब बारां जिले में धनिये की बुवाई लगभग 80 हजार हैक्टेयर में होती थी, लेकिन वर्ष 2005 से इसके प्रति किसानों का मोह भंग होने लगा। इसके बाद धनिये का क्षेत्रफल लगतार कम होता चला गया और इस वर्ष जिले में 11 हजार 800 हैक्टेयर में ही धनिये की बुवाई है। ऐसे में जिला प्रदेश में मसाला फसलों के उत्पादन में काफी पिछड़ गया।
पानी मिला तो बढ़ा लहसुन का क्षेत्रफल
लहसुन भी मसाला फसलों में आता है। करीब डेढ़ दशक से जिले के किसानों का रुझान लहसुन उत्पादन के प्रति खासा बढ़ा है। गत वर्ष 36 हजार हैक्टेयर में लहसुन की बुवाई हुई थी, लेकिन किसानों को भाव नहीं मिलने से इसका क्षेत्रफल इस वर्ष गिरकर 30 हजार 420 हैक्टेयर रह गया है, बुवाई में यह गिरावट भी किसानों के लहसुन के प्रति मोह को दर्शाती है।
अन्ता, मांगरोल क्षेत्र में हो रहे नवाचार
जिले के अंता व मांगरोल क्षेत्र के किसान फसल चक्र में बदलाव के साथ नवाचार को लेकर जागरूक है। इन इलाकों में हल्दी, कलोंजी व मेथी के प्रति रुझान बढऩे लगा है। लहसुन उत्पादन में इन दोनों उपखंडों के किसान खासी रुचि दिखाते हैं। यह इलाका चबल की दांयी मुय नहर से सिंचित होने के कारण भी रबी की फसलों के लिए प्रचुर मात्रा में पानी की उपलब्धता रहती है।
नाम से बिकती है इनकी हल्दी-मिर्च
अन्ता क्षेत्र के गुलाबपुरा गांव निवासी व राष्ट्रीय पुरस्कार से समानित कृषक गणपतलाल नागर बरसों से जैविक हल्दी व मिर्च का उत्पादन ले रहे हैं। वहीं दो दशक से औषधि सफेद मूसली की उपज भी ले रहे हैं। नागर घरों पर हल्दी, मिर्च व धनिये की पिसाई कर पैकिंग के रूप में विक्रय करते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों की ओर से प्रदेशभर में लगाए जाने वाले मेलों में इन्हें स्टाल लगाने के लिए बुलाया जाता है।

-जिले के किसानों में बागवानी के साथ अब फिर से मसाला फसलों के उत्पादन के रुझान बढऩा शुभ संकेत हैं। सब्जी उत्पादन को लेकर भी किसान जागरूक हो रहे हैं। धनिये के भाव में उछाल आने पर जिला फिर से प्रदेश में मसाला उत्पादन में अपना दम दिखाएगा। जिले में जीरा व आजवायन के उत्पादन के लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा।
-एनबी मालव, उपनिदेशक कृषि विस्तार (उद्यान) बारां

वर्ष 2022-23 मसाला फसलों का विवरण
फसल क्षेत्रफल संभावित उत्पादन
धनिया 11800 हैक्टेयर 17700 मैट्रिक टन
लहसुन 30420 हैक्टेयर 127730 मैट्रिक टन
मिर्च 185 हैक्टेयर 278 मैट्रिक टन
मेथी 142 हैक्टेयर 256 मैट्रिक टन
कलोंजी 68 हैक्टेयर 102 मैट्रिक टन
हल्दी 28 हैक्टेयर 700 मैट्रिक टन