बारां. कोरोना महामारी के बीच प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से एहतियात के तौर पर यहां जिला चिकित्सालय में गुरुवार को अलग से ब्लैक फंगस वार्ड शुरू कर दिया गया है। फिलहाल जिले में एक भी मरीज चिन्हित नहीं हुआ है। एहतियात के तौर पर मेल-फिमेल मेडिकल ब्लॉक में आधा दर्जन बेड लगाकर एक वार्ड तैयार किया गया है। वैसे जिले के एक-एक रोगी कोटा व जयपुर में निजी चिकित्सालयों में भर्ती होने तथा छबड़ा क्षेत्र निवासी एक मरीज की मृत्यु होने की जानकारी भी सामने आ रही है। मृतक छबड़ा निवासी मरीज यहां के एक निजी चिकित्सालय में भर्ती था तथा डिस्चार्ज के बाद कोटा चला गया तथा रिकवर होने के बाद घर पर था। उसकी आंख पर सूजन आ गई तथा बाद में 15 मई केा उसकी मृत्यु हो गई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसकी अधिकृत तौर पर पुष्टि नहीं की गई है। गुरुवार शाम तक विभागीय अधिकारी भी इस सम्बंध में जानकारी जुटाते रहे।
इन मरीजों को रहना होगा ज्यादा सतर्क
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) विशेष तौर पर कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों पर अटैक कर रहा है। लेकिन मधुमेह, किडनी, एचआईवी पीडि़त, कैंसर व डायलिसिस वाले मरीजों पर भी इसका अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। फंगस मिट्टी व नमी वाली जगह पर होती है। वहां से यह किसी माध्यम के द्वारा आंख, नाक आदि तक पहुंच जाती है। कई बार फंगस मस्तिष्क तक पहुंच जाती है। जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
पांच चिकित्सकों की टीम का गठन किया
इस बीमारी के उपचार आदि के लिए जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की एक कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी का प्रभारी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके मालव को नियुक्त किया गया है तथा ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. पवन मीना, चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. भोलाराम दिलावर, फिजिशियन डॉ. हरिओम मीना, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गिरिराज मीना को कमेटी में शामिल किया गया है। कमेटी मरीजों के उपचार व उनकी अन्य आवश्यकताओं का निस्तारण करेगी। इसके लिए जरूरी इंजेक्शन का मांग पत्र सरकार को भेजा गया है।