22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बारां की मंडी में आया पौष्टिक गुणों से भरपूर ‘काला’ गेहूं …

रूस, कजाकिस्तान व चीन के अलावा मध्य और पूर्वी यूरोप में मुख्य रुप से खेती

less than 1 minute read
Google source verification

बारां

image

Mukesh Gaur

Dec 17, 2021

बारां की मंडी में आया पौष्टिक गुणों से भरपूर 'काला' गेहूं ...

बारां की मंडी में आया पौष्टिक गुणों से भरपूर 'काला' गेहूं ...

बारां. काला गेहूं सेहत का खजाना है। इसमें प्रोटीन, मैग्निशियम, काब्र्ज जैसे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह सेहत के लिए काफी मददगार है। गंभीर रोगो से भी यह दूर रखता है। काले गेहूं का सेवन हर मोसम में किया जा सकता है। इसमे रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अधिक होती है। काले गेहूं का उत्पादन कम पानी में भी हो जाता है।
रूस, कजाकिस्तान व चीन के अलावा मध्य और पूर्वी यूरोप में मुख्य रुप से खेती की जाती है। अन्ता कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डीके सिंह ने बताया कि यहां पर काले गेहूं की खेती बहुत ही कम की जाती है। इसकी पैदावार कम होती है। इसका उत्पादन 6 से 7 क्विंटल प्रति बीघा होता है। वहीं बाजार में इसकी रेट भी सामान्य गेहूं जैसी ही होने के कारण किसान अधिक नही करते है। कुछ किसान ही इसे करते है।
बारां की कृषि उपज मंडी में शुक्रवार को बिक्री के लिए लाया गया काला गेहूं। जो 1605 रुपए प्रति क्विंटल तक ही बिका। गेहूं कोटा जिले की इटावा तहसील के गणेशखेड़ा गांव निवासी किसान महावीर चौधरी लेर आया था।
काला गेहूं , एक साबुत अनाज होता है। इसके अलग बीज होते हैं। कई दुर्लभ गुणों के कारण इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद माना गया है। इसकी पुष्टि कई रिसर्च और अध्ययन में वैज्ञानिकों ने की है। इनकी खासियत ये है कि ये अन्य अनाज की तरह घास पर नहीं उगते हैं। ये अन्य सामान्य छद्म कोशिकाओं वाले अनाज क्विनोआ और ऐमारैंथ के समूह में शामिल हैं। इस गेहूं की प्रजातियां कई साल पहले पेश की गई थीं, लेकिन कई वर्षों के शोध के बाद। काले गेहूं का उत्पादन नेशनल एग्रो-फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, मोहाली पंजाब में 2017 में किया गया था। ताजा खबरों के अनुसार, संस्थान के पास अब ब्लैक व्हीट का पेटेंट है।