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11 साल से जमे अध्यक्षों की हिलेगी कुर्सी

बारां. नगर निकाय व पंचायतराज संस्थाओं के चुनाव के बाद अब जिले में ग्राम सेवा सहकारी समितियों व बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई है। हालांकि अभी राज्य सरकार ने चुनाव के लिए तिथियों का निर्धारण नहीं किया है, लेकिन गत विधानसभा सत्र में नए प्रारूप के मंजूर होने से इनदिनों सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों में वार्डों के गठन का कार्य शुरू कर दिया गया है।

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11 साल से जमे अध्यक्षों की हिलेगी कुर्सी

11 साल से जमे अध्यक्षों की हिलेगी कुर्सी

बारां. नगर निकाय व पंचायतराज संस्थाओं के चुनाव के बाद अब जिले में ग्राम सेवा सहकारी समितियों व बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई है। हालांकि अभी राज्य सरकार ने चुनाव के लिए तिथियों का निर्धारण नहीं किया है, लेकिन गत विधानसभा सत्र में नए प्रारूप के मंजूर होने से इनदिनों सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों में वार्डों के गठन का कार्य शुरू कर दिया गया है। जिले में कुल 175 ग्राम सेवा व बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियां हैं। इनमें लगभग 70 हजार सदस्य हैं। प्रत्येक सहकारी व बहुउद्देयीय समिति में सदस्य संख्या के अनुसार 12 वार्डों का गठन होगा। सदस्य अधिक होने पर इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। ऐसे में अब सहकारी चुनावों को लेकर गांवों में हलचल बढऩे लगी है। रजिस्ट्रार सहकारी समितियां के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रत्येक समिति में लगभग 400 सदस्य है और 30 या इससे अधिक सदस्यों का एक वार्ड गठित किया जाना है। सहकारी समितियों के व्यवस्थापक इनदिनों वार्डों
के गठन की प्रक्रिया पूरा करने में
जुटे हैं।
एक दशक से जमे हैं सहकार के संवाहक
पूर्व में सहकारी समितियों के चुनाव वर्ष 2011 में हुए थे। इसके बाद चुनाव नहीं होने से करीब 11 वर्षों से अध्यक्ष पद पर एक ही व्यक्ति काबिज है। पिछले वर्ष जिले में लगभग आधा दर्जन सहकारी समितियों व लैम्पस में चुनाव होने से वहां नया बोर्ड गठित हो चुका है। जबकि शेष संस्थाओं में पुराना बोर्ड ही कामकाज संभाल रहा है। इससे सहकार का मूलभूत सिद्धांत भी प्रभावित हो रहा है।
समिति में चार वार्ड रहेंगे आरक्षित
प्रत्येक समिति में चार वार्ड आरक्षित रहेंगे। इनमें एक अनुसूचित जाति, एक अनुसूचित जन जाति व दो वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए जा रहे हैं। सदस्य पद के लिए ऋणी व अऋणी सदस्य योग्य होंगे। लेकिन अध्यक्ष पद के लिए ऋणी सदस्य ही चुनाव लड़ सकेंगे। अध्यक्ष पद पर कोई आरक्षण भी लागू नहीं होगा। इससे सहकार की सरकार की कमान संभालने के लिए कई दावेदार सामने आने लगे हैं।
& अभी सरकार ने चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन जिले में अधिकांश सहकारी समितियों में चुनाव की तैयारियों के तहत वार्डों का गठन किया जा रहा है। इससे चुनाव की तिथि निर्धारित होने के बाद आसानी होगी। रजिस्ट्रार स्तर भी चुनाव के लिए कवायद शुरू कर दी गई है।
सौमित्र कुमार मंगल, उपरजिस्ट्रार सहकारी समितियां बारां