
ये कैसी व्यवस्था... इधर कॉलेज में परीक्षा जारी, उधर चुनाव की तैयारी
बारां. सरकार की ओर से कोरोनाकाल के दो वर्ष बाद एक बार फिर कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है, लेकिन इन दिनों कॉलेजों में परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया भी चल रही है। कई छात्रों के प्रेक्टिकल नहीं हुए। इसके अलावा हजारों छात्र परीक्षा परिणाम जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए छात्र संगठनों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई छात्र नेताओं में सरकार की ओर से घोषित किए चुनाव कार्यक्रम को लेकर नाराजगी है। घोषित कार्यक्रम के तहत 18 अगस्त को मतदाता सूचियों का प्रकाशन तथा 26 अगस्त को मतदान होगा, लेकिन प्रथम वर्ष के छात्रों की तो परीक्षा ही 18 अगस्त को समाप्त होगी। इसी दिन मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। सबसे अधिक दुविधा चुनाव लडऩे का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को लेकर रहेगी।
सर्कुलर का अब तक अता-पता नहीं
सूत्रों का कहना है कि आयुक्तालय की ओर से प्रत्याशियों की पदवार योग्यता आदि को लेकर भी सर्कुलर जारी किया जाता है, लेकिन इस वर्ष अब तक तो जारी नहीं किया गया। कोरोना से पहले चुनाव हुए तब सर्कुलर जारी किया गया था। इससे सर्कूलर की स्थिति को लेकर भी असंमजस है। पूर्व में जारी सर्कुलर में छात्र संघ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत सभी पदों के लिए योग्यता आदि तय की हुई थी। उसके मुताबिक स्नातक प्रथम वर्ष का छात्र चुनाव नहीं लड़ सकता। द्वितीय वर्ष का छात्र केवल उपाध्यक्ष व सचिव पद के लिए लड़ सकता है। अध्यक्ष पद का चुनाव फाइनल व एमए का छात्र लड़ सकता है। फिलहाल इस मामले को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
परीक्षा परिणाम भी जारी नहीं हुए
जानकारों का कहना है कि चुनाव से पहले सभी परीक्षाओं के परिणाम जारी होने तथा प्रवेश प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। परीक्षा परिणाम के बाद ही कक्षावार मतदाताओं की संख्या तय होगी। 12वीं के बाद स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले छात्र तो प्रथम वर्ष के मतदाता रहेंगे, लेकिन प्रथम वर्ष की परीक्षा देने वाले जिनका परिणाम जारी नहीं किया गया है। उन्हें किस कक्षा का मतदाता माना जाएगा। इसी तरह चुनाव लडऩे वाले छात्रों को लेकर असमंजस की स्थिति है। चुनाव जीतने के बाद विजेता प्रत्याशी फेल हो जाता है तो उसकी भूमिका क्या रहेगी।
जिले में नए खोले गए 4 कॉलेज को छोड़ सभी कॉलेजों में चुनाव होंगे। इसके लिए कार्यक्रम जारी हो गया है। 18 को नामांकन सूची का प्रकाशन किया जाएगा। उच्चाधिकारियों के आदेशों की पालना करते हुए घोषित कार्यक्रम के तहत चुनाव कराए जाएंगे।
डीके गोचर, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, बारां
सरकार की ओर से 26 अगस्त को छात्रसंघ चुनाव की घोषणा कर दी, लेकिन आधे छात्रों के न प्रवेश, न रिजल्ट का पता है। जब छात्र भाग ही नहीं लेंगे तो चुनाव कैसा? एबीवीपी इसका विरोध करेगी।
कोमल मीणा, प्रांत सहमंत्री, चितौड प्रांत, अभाविप
चुनाव कराने के सरकार के निर्णय से छात्र-छात्राएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझेंगे। वर्तमान में परीक्षाएं चल रही है और लगभग सभी कक्षाओं के परिणाम बाकी हैं। चुनाव समय पर हो, ताकि पढ़ाई भी प्रभावित न हो।
धनकुमार मीणा, पूर्व जिलाध्यक्ष, एनएसयूआई
Published on:
02 Aug 2022 11:49 pm
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