7 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दावेदार कहने लगे, टिकट मिला तो लड़ेंगे चुनाव

कहीं गुटबाजी, कहीं मन राजी तो फिर लगा देंगे बाजी

2 min read
Google source verification

बारां

image

Mukesh Gaur

Nov 26, 2021

दावेदार कहने लगे, टिकट मिला तो लड़ेंगे चुनाव

दावेदार कहने लगे, टिकट मिला तो लड़ेंगे चुनाव

बारां. जिला परिषद चुनाव को लेकर अब राजनीतिक दलों के नेताओं ने खुद या अपने परिजनों के टिकट के लिए जोड़-तोड़ के साथ कद्दावर नेताओं से मेल-मुलाकात बढ़ाना शुरू कर दिया। गांवों में किसान अभी खेती-किसानी के कार्यों में जुटे हैं, लेकिन जिला मुख्यालय पर आगामी जिला प्रमुख व प्रधानों के नामों की चर्चा जोर-शोर से चलने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी को चुनाव के लिए प्रभारी नियुक्त किया है। जबकि कांग्रेस की बागडोर खनन एवं गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया के हाथ में रहेगी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में इन दोनों ही दलों के नेता जुगाड़ की राजनीति में गुरेज नहीं कर रहे।

भाजपा में रहेगी मारामारी
पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जिला प्रभारी के रूप में वरिष्ठ नेता वासुदेव देवनानी की नियुक्ति की है। उनके साथ चित्तौडगढ़़ के जिला प्रमुख सुरेश धाकड़ व रामनिवास मेघवाल को सहयोगी के रूप में लगाया गया है। माना जाता है कि देवनानी संघ की पृष्ठिभूमि से भाजपा में आए हैं। जबकि बारां जिला भाजपा संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे का दबदबा है। ऐसे में टिकट वितरण के दौरान भाजपा में गुटबाजी और भी मुखर हो सकती है। हालांकि दोनों ही गुटों के पदाधिकारी टिकट वितरण में अपनी भूमिका अहम होने की ही बात करते नहीं थक रहे।

तय है कांग्रेस की कमान
दूसरी ओर बीते कई बरसों से जिले में कांग्रेस की राजनीति में अन्ता विधायक खनन व गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया के हाथ रहती आई है। बारां-अटरू विधायक व जिला कांग्रेस अध्यक्ष पानाचंद मेघवाल भी भाया के विश्वस्त सहयोगी की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के सिम्बल पर पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्यों का चुनाव लडऩे के दावेदार इन्हीं दोनों नेताओं की हरी झंडी के लिए जोड़तोड़ में जुट गए है। इस बार जिला प्रमुख का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित होने से मंत्री भाया पर पार्टी नेताओं की बड़ी उम्मीद टिकी है।

दोनों दलों को सफलता
जिले में अब तक पांच जिला प्रमुख निर्वाचित हुए हैं। इनमें भाजपा के तीन व कांग्रेस के दो रहे हैं। ऐसे में यहां भी राज्य विधानसभा का चुनाव ट्रेंड दोहराया जा रहा है। यह चर्चा भी लोगों की जुबां पर है तो कई लोग कहते है कि यदि भाजपा एकजुटता से चुनाव लड़े तो हालात पलट भी सकते हैं। वर्ष 2000 में भाजपा बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस के कद्दावर नेता शान्ति धारीवाल की रणनीति व भाजपा के कुछ निर्वाचित सदस्यों की क्रॉस वोटिंग से जीती बाजी हार गई थी। अब फिर से इसी जोड़तोड़ की राजनीति की भी चर्चा आम होने लगी है।