
Emergency Ambulance Service
बारां. दुर्घटना व झगड़े के घायलों समेत प्रसूताओं को आवश्यकता के समय चिकित्सा केन्द्रों तक पहुंचाने वाले 108 व 104 रोगी वाहन की आपातकालीन सेवा जिले में आए दिन लडख़ड़ा रही है। कहीं खराबी आने से इनके पहिये थमते आए हैं तो कहीं चालू होने के बावजूद इनमें आवश्यक उपकरण नहीं हैं। कहीं ऐसे वाहन भी हैं जिनमें कांच, गेट खराब होने से भीषण गर्मी के दिनों में लू के थपेड़े रोगी व तीमारदारों पर भारी पड़ते हैं। कई एम्बुलेंसों में एसी पिछले दो-तीन वर्षों से खराब हैं। किसी भी पेशेन्ट सीट टूटी हुई है तो किसी में फर्श। रोड पर चलने के दौरान ऐसे वाहनों के कलपुर्जे हिलने लगते हैं। वर्षों से सड़कों पर फर्राटे भरते ऐसे कई वाहन अब हांफने लगे हैं लेकिन जैसे-तैसे इन्हें दौड़ाया जा रहा है। जिले में 104 एम्बुलेंस 18 व 108 एम्बुलेंस 15 हैं। साथ ही दो बेस एम्बुलेंस भी सेवारत है।
परेशानी का सफर
108 एम्बुलेंसों में अधिकांश में खराबियों के कारण एसी नहीं चल रहे तो कई 108 में पंखे नहीं है। घायलों, प्रसूताओं को अस्पताल तक पहुंचाने का सफर खुद उनके अलावा तीमारदारों पर भी भारी पड़ता है। भीषण गर्मी में गर्म हवाओं के थपेड़े सहने पड़ते हैं। अधिकांश एम्बुलेंसों में एसी बंद पड़े हुए तो कई महीने हो गए हैं। रेलावन समेत कुछ जगह 108वाहन छोटे होने से दूरस्थ इलाकों में पहुंचने मेंं कई बार खासी दिक्कतें आती है।
कई बार बनी विषम स्थितियां
पिछले साल केलवाड़ा अस्पताल में कार्यरत एक कम्पाउंडर दुर्घटना के बाद करीब एक घंटे सड़क पड़ा रहा। इस बीच न 104 आई न 108 एम्बुलेंस। आखिर परिजनों ने अन्य वाहन की व्यवस्था कर उसे केलवाड़ा अस्पताल पहुंचाया। किशनगंज क्षेत्र के रेलावन में उपलब्ध 104 वाहन पूर्व मौकों पर कई बार खराब हो चुका है। एक-दो बार तो इस 104 को धक्के तक लगाने पड़े हैं। छीपाबड़ौद की एम्बुलेंस अभी बारां में खड़ी हुई है तो यही हाल आटोन की एम्बुलेंस का है। ऐसे में आटोन में जरूरत के समय दूसरी एम्बुलेंसों की सेवाएं ली जा रही है।
Published on:
02 Jun 2018 01:24 pm
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