4 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Baran: मरने के बाद भी दूसरों की जिंदगी कर रहे रोशन, 2013 में हुआ था पहला नेत्रदान, जानें पूरा आंकड़ा

First Eye And Body Donation In Baran: बारां जिले में सबसे पहला नेत्रदान गुजराती परिवार के भाविन शाह ने किया। इसके बाद यह सिलसिला अब तक जारी है।

4 min read
Google source verification

बारां

image

Akshita Deora

image

मुकेश गौड़

Jan 08, 2026

Eye-Donation

फोटो: पत्रिका

Eye Donation In Kota Division: बारां जिले में नेत्रदान एवं देहदान के प्रति लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। सामाजिक संगठनों व स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से आमजन अब मृत्यु उपरांत भी मानव सेवा को सर्वोच्च मानते हुए नेत्रदान व देहदान के लिए आगे आ रहे हैं। हाल ही में जिले में नेत्रदान की घटनाओं से जरूरतमंदों को नई दृष्टि मिलने की उम्मीद जगी है। यह जागरुकता का ही असर है कि 2011 से अब तक संभाग के चारों जिलों को मिलाकर नेत्रदानियों की कुल 1544 जोड़ी आंखें धारकों की जिंदगी को रोशन कर रही हैं। खास बात यह है कि जिले में अब तक हुए कुल 70 नेत्रदान में से 22 नेत्रदान 2025 में लिए गए हैं।

नेत्रदान : छह घंटे में डोनेट करना जरूरी

नेत्रदान के माध्यम से मृतक की आंखों के कॉर्निया से दो दृष्टिहीन लोगों को रोशनी मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार मृत्यु के छह घंटे के भीतर नेत्रदान किया जाना आवश्यक होता है। इसके लिए परिजन निकटवर्ती नेत्र बैंक अथवा संबंधित हेल्पलाइन पर सूचना देते हैं, जिसके बाद प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर विधिवत प्रक्रिया पूरी करती है। नेत्रदान से चेहरे की बनावट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

देहदान : परिजन की सहमति से निर्णय

इसी तरह देहदान चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता है। देहदान से मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना को समझने में सहायता मिलती है। देहदान अथवा अंगदान के लिए जीवनकाल में पंजीयन कराया जा सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय परिजनों की सहमति से ही संभव होता है।

दान कोई भी हो, किसी जरूरतमंद के लिए अहम होता है। रक्तदान, नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान के लिए जिले में लोगों को आगे आना होगा। साथ ही वे अपने परिजनों को भी इस संबंध में अवगत कराएं, ताकि किसी जरूरतमंद को नया जीवन या नई रोशनी मिल सके। हालांकि नेत्रदान के मामले में जिले में काफी अच्छे प्रयास और काम हो रहे हैं। इससे और लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।

डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएचओ

शाइन इंडिया फाउंडेशन ने की शुरूआत

नेत्रदान का बीज वर्ष 2011 में शाइन इंडिया फाउंडेशन ने बोया। इसकी स्थापना हाडोती संभाग में डॉ. कुलवंत गौड़ और डॉ. संगीता गौड़ ने की। इसके बाद संस्था की ओर से संभाग में नेत्रदान, अंगदान और देहदान की जागरूकता का अभियान चलाया गया। प्रारंभिक दौर में समाज में नेत्रदान को लेकर अनेक भ्रांतियां व्याप्त थीं। इन्हें दूर करने के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन ने स्कूलों, कॉलेजों एवं सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से छोटी-छोटी कार्यशालाओं का आयोजन कर नेत्रदान, अंगदान व देहदान की प्रक्रिया की जानकारी दी और लोगों को इसके लिए प्रेरित किया।

2013 से हुई शुरूआत

जिले में सबसे पहला नेत्रदान गुजराती परिवार के भाविन शाह ने किया। इसके बाद यह सिलसिला अब तक जारी है। डॉ. गौड़ ने बताया कि नेत्रदान जागरूकता के अनवरत अभियान से लोगों ने जाना कि नेत्रदान 10 मिनट में पूरी हो जाने वाली एक अत्यंत सरल प्रक्रिया है। इसमें पूरी आंख नहीं ली जाती, सिर्फ आंख के सामने की पारदर्शी झिल्ली, जिसे हम कॉर्निया या आम बोलचाल की भाषा में पुतली कहते हैं, वही ली जाती है। इसमें किसी तरह का कोई रक्त नहीं निकलता है न ही चेहरे में किसी तरह की कोई भी विकृति आती है, यह प्रक्रिया घर पर, श्मशान में या एंबुलेंस में कहीं पर भी की जा सकती है।

कौन कर सकता है

नेत्रदान 2 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक की उम्र के लोग कर सकते हैं। यदि व्यक्ति स्वस्थ है तो अधिक उम्र में भी नेत्रदान संभव है।

अब तक तीन देहदान

नेत्रदान के साथ-साथ अन्नपूर्णा नगरी बारां में पिछले चार-पांच साल में देहदान के लिए भी जागरूक हुई है बीते वर्षों में संस्था के जागरूकता प्रयासों से तीन देहदान संपन्न हुए हैं। इसमें जिले से रेवती ठाकुर बारां, कमला बाई जैन समरानियां और राजरानी अधलखा छीपाबड़ौद के नाम हैं।

मेडिकल कॉलेज को मिला पहला देहदान

बूंदी जिले के अड़ीला निवासी शिक्षाविद छोटू लाल बाथरा ने अपनी मृत्यु को भी जीवनदान में बदल दिया। उनके पार्थिव शरीर के दान से बारां मेडिकल कॉलेज के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। कॉलेज को अपनी स्थापना के बाद पहली बार एनाॅटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) की पढ़ाई के लिए 'कैडेवर' (पार्थिव देह) प्राप्त हुआ है।

इस पर बारां मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सी.एम. मीणा ने कहा कि वे पिछले दो साल से कैडेवर के इंतजार में थे। हमें पहला देहदान मिला है। यह दान हमारे बच्चों को होनहार डॉक्टर बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।

80 नेत्र और 25 देहदानी कतार में

शाइन इंडिया फाउंडेशन बारां के संयोजक हितेश खंडेलवाल ने बताया कि भारत विकास परिषद के प्रयासों से बारां जिले में अब तक 80 से अधिक नेत्रदान और 25 से अधिक देहदान के संकल्प पत्र भरे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज बारां को सुचारू पढ़ाई के लिए अभी भी लगभग 20 और देहदान की आवश्यकता है।

हाड़ौती में 2011 से अब तक नेत्रदान

स्थान - जोड़ी संग्रह - प्रथम दानी - दिनांक
कोटा - 1144 - रीना देवी - 07 अक्टूबर 2011
बारां - 80 - भाविन शाह - 27 नवंबर 2013
बूंदी - 85 - विनोद कोटिया - 14 अक्टूबर 2015
झालावाड़ - 180 - देवेन्द्र जैन - 22 मार्च 2013
संभाग से अब तक कुल 1544 जोड़ी नेत्रदान