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सावधान: बढ़ा हार्ट अटैक से मौत का खतरा, अब कोटा के मथुराधीश मंदिर के महामंत्री का निधन, अचानक बेड से गिरे

General Secretary Of Shri Mathuradheesh Temple Died: कोटा में हाल के दिनों में हार्ट अटैक से अचानक होने वाली मौतों के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिससे शहरवासियों में चिंता का माहौल है। ताजा मामला श्री मथुराधीश मंदिर के महामंत्री महेश मोनू व्यास के निधन का है।

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कोटा

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Akshita Deora

Jan 08, 2026

Monu-Vyas-Death

महेश मोनू व्यास की फाइल फोटो: पत्रिका

Kota's Mahesh Monu Vyas Dies By Heart Attack: कोटा शहर में हाल ही महीनों में हार्ट अटैक से अचानक मौतों के मामलों ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। इनमें युवा, छात्र और जनप्रतिनिधि तक शामिल हैं। ताजा मामला श्री मथुराधीश मंदिर के महामंत्री महेश मोनू व्यास (44) के निधन का है, जिनकी बुधवार को हृदय गति रुकने से मौत हो गई।

मंदिर व्यवस्थापक चेतन सेठ ने बताया कि मोनू व्यास लंबे समय से पाटनपोल स्थित श्री बड़े मथुराधीश मंदिर के टेंपल बोर्ड में मंत्री के रूप में सेवाएं दे रहे थे। वे नियमित रूप से जिम भी जाते थे, हालांकि पिछले कुछ दिनों से उन्होंने जिम जाना बंद कर दिया था। बुधवार शाम करीब 4.30 बजे वे अचानक घर में बेड से गिर पड़े।

परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। उनके निधन पर प्रथम पीठ युवराज गोस्वामी मिलन कुमार बावा ने शोक व्यक्त किया। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 10 बजे किया जाएगा।

हाल के प्रमुख मामले

सरपंच की मौत (नवंबर 2025) : बोराबास के सरपंच अर्जुन गुंजल वाहन चलाते समय हार्ट अटैक से अचेत हो गए। वाहन डिवाइडर से टकरा गया और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

युवा और छात्र : हॉकी खेलते समय, जिम में, मोबाइल देखते हुए या पढ़ाई के दौरान भी युवाओं और छात्रों को अचानक हार्ट अटैक आने के मामले सामने आए हैं, जिनमें कई की जान नहीं बच सकी।

ये बताए जा रहे मुख्य कारण

  • अनियमित जीवनशैली और प्रोसेस्ड व जंक फूड का अधिक सेवन
  • शारीरिक गतिविधि की कमी या अत्यधिक वर्कआउट
  • मानसिक तनाव

समय पर स्वास्थ्य जांच नहीं कराना

चिकित्सकों के अनुसार, अब हार्ट अटैक केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। बच्चों और युवाओं में भी यह खतरा तेजी से बढ़ रहा है। कई मामलों में समय पर सीपीआर देने से जान बची है, लेकिन गंभीर स्थितियों में डॉक्टर भी असहाय हो जाते हैं। ऐसे में युवाओं को अपनी दिनचर्या, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।


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