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सावन के सोमवार पर विशेष : बाहर से जीर्णशीर्ण, अन्दर से अलौकिक है अटरू का फूलदेवरा शिवालय

अंदर से यह एक-एक पत्थर इतना सफाई व व्यवस्थित ढंग से जमा हुआ है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं। इनमें रेत, सीमेंट व चूने का उपयोग नहीं किया गया है।

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बारां

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Mukesh Gaur

Aug 19, 2024

अंदर से यह एक-एक पत्थर इतना सफाई व व्यवस्थित ढंग से जमा हुआ है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं। इनमें रेत, सीमेंट व चूने का उपयोग नहीं किया गया है।

अंदर से यह एक-एक पत्थर इतना सफाई व व्यवस्थित ढंग से जमा हुआ है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं। इनमें रेत, सीमेंट व चूने का उपयोग नहीं किया गया है।

special story : अटरू. कस्बा वैसे तो पुरासम्पदा से भरा है, यहां जगह-जगह पुरासम्पदा बिखरी है। इनमें एक-एक पत्थरों पर शिल्पकारों ने अनूठी कला उकेरी है। इनमें से ही एक कस्बे के मध्य स्थित फूलदेवरा शिव मंदिर। मंदिर को बाहर से देखो तो यह पत्थरों का खंडहर नजर आता है।

अंदर से यह एक-एक पत्थर इतना सफाई व व्यवस्थित ढंग से जमा हुआ है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं। इनमें रेत, सीमेंट व चूने का उपयोग नहीं किया गया है। इसी मंदिर में विशाल ​शिवलिंग है। वैसे तो यहां प्रतिदिन जलाभिषेक करने वाले भक्तों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन अभी श्रावण मास में तो यहां प्रात: पांच बजे से शिव भक्तों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। सायं को आरती के समय तो यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहते हैं।

मांगरोल : बसावट का प्रतीक मंगलेश्वर महादेव मंदिर

मांगरोल की बसावट के प्रतीक रूप में मौजूद मंगलेश्वर महादेव मंदिर पर सावन के दिनों में खासी भीड़ जुटती है। प्राचीन काल से यहां गौराजी के बीहड़ में बस्ती के प्रमाण मिले हैं। बाद में घने जंगल में स्थित महादेव मंदिर का सीमावर्ती राज्य मध्यप्रदेश के गूगली गौत्र के मंगल्या मीणा ने जावदेश्वर से जीर्णोद्धार कराया। इतिहासविद गजेन्द्र ङ्क्षसह यादव के अनुसार मांगरोल की बसावट करीब 1500 साल पहले की बताई जाती है। लेकिन इसके स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं। पहले ऊंचाई पर टोडियों के रूप में बस्तियां बसी, जो अब भी मिश्रा टोडी, जाटा टोडी, ब्रहम भारती टोडी के रूप में विद्यमान है। मंगल्या मीणा के कारण ही इसका नाम मांगरोल पड़ा। अब मंगलेश्वर महादेव के आसपास सघन बसावट है। सावन में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

महादेव का अभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालु

भंवरगढ़ क्षेत्र के कापड़ीखेड़ा गांव के शिवभक्तों ने कमलेश्वर महादेवजी की बावड़ी से कांवड़ यात्रा निकाली। यह कापड़ीखेड़ा गांव के पंचङ्क्षलगी महादेव मंदिर पहुंच भगवान शिव का अभिषेक किया। कापड़ी खेड़ा के पवन चौधरी ने बताया कि प्रात: गांव के सभी महिला पुरुष भंवरगढ़ कमलेश्वर महादेव मंदिर परिसर स्थित बावड़ी पर पहुंचे। यहां पूजा के बाद बावड़ी का जल कलशों में भरकर कांवड़ यात्रा के रूप में यहां पहुंचे, इसके बाद सभी भक्तो ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया, कलश यात्रा में कई श्रद्धालु शामिल रहे।