
Functional research of teachers
बारां. सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 8वीं तक के छात्र-छात्राओं का नियमित स्कूल नहीं आना शिक्षकों की सबसे बड़ी समस्या है। इससे स्कूल का शैक्षणिक स्तर निरन्तर गिरता जाता है, जिससे शिक्षकों को उच्चाधिकारियों की डांट सुनने पड़ती है। शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई अलग से होती है। हालांकि शैक्षणिक स्तर में अपेक्षिक सुधार न होना, शिक्षण प्रक्रिया में विद्यार्थियों का न सीखना, समुदाय की सहभागिता न होना व छात्रों का पलायन कर जाना भी समस्याएं हैं, लेकिन ज्यादातर शिक्षक छात्र-छात्राओं के नियमित स्कूल नहीं आने से पीडि़त हैं। यह समस्याएं 200 स्कूलों के शिक्षकों के क्रियात्मक अनुसंधान (लघुशोध) में सामने आई है।
ये मिले थे निर्देश
स्कूल संचालन व शैक्षणिक कार्य कराने में कई समस्याएं आती हैं। उक्त समस्याओं का निवारण करने के लिए राजस्थान राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद उदयपुर ने रूपरेखा तैयार की। इसके तहत शिक्षक एक समूह बनाकर समस्याएं बताएं। इसके बाद उनके निराकरण की रूपरेखा तैयार करें। ऐसे में स्कूल के शैक्षणिक स्तर में सुधार होगा।
इन्होंने किया शोध
इसको लेकर डाइट की ओर से कक्षा 1 से 8वीं के 200 स्कूलों के शिक्षकों का चार-चार दिवसीय क्रियात्मक अनुसंधान (लघु शोध) आयोजित किया गया। उक्त अनुसंधान संदर्भ व्यक्ति दिनेश वैष्णव, गौरव वशिष्ठ, महेश कुमार, पूनम गौतम व राजेश शर्मा ने कराया। वैष्णव ने बताया कि अनुसंधान सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षेत्रीय अंत क्रियाएं एवं नवाचार समन्वय प्रभाग (आईएफआईसी) की ओर से आयोजित किया गया। प्रशिक्षण प्रभारी डाइट के उपप्रधानाचार्य बिरदीलाल नागर थे।
शिक्षकों के बनाए ग्रुप
लघु शोध चार दिनों तक किया गया। इसमें शिक्षकों के ग्रुप बनाए गए। ग्रुप में शामिल शिक्षकों ने स्कूल की प्रमुख समस्याओं को लिखा। समस्याओं के समाधान को लेकर लघु शोध किया। राज्य संदर्भ व्यक्ति दिनेश वैष्णव ने बताया कि लघु शोध के दौरान समस्याओं के हल करने की योजना तैयार की गई है।
डाइट की रहेगी नजर
शोध में शामिल प्रत्येक स्कूल पर डाइट के संदर्भ व्यक्तियों की विशेष नजर रहेगी। इस दौरान यह देखा जाएगा कि शोध में आने वालीे समस्याओं का समाधान हुआ है या नहीं हुआ है। उक्त अनुसंधान प्रयोग के तौर पर फिलहाल 200 स्कूलों के शिक्षकों का था। यदि शोध के सकारात्मक परिणाम निकले तो अन्य स्कूलों को भी बुलाया जाएगा।
स्कूलों व छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर क्रियात्मक अनुसंधान (लघु शोध) किया गया है। शोध के निष्कर्ष के आधार पर कार्य योजना तैयार कर शैक्षिक कार्य को गति दी जाएगी।
रामखिलाड़ी, प्रधानाचार्य, डाइट, बारां
Published on:
23 Dec 2018 01:21 pm
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