यह कैसा कॉलेज, पढ़ाने वाले ही नहीं ,तीसरे साल भी यही हालात

यह कैसा कॉलेज, पढ़ाने वाले ही नहीं ,तीसरे साल भी यही हालात

Shivbhan Sharan Singh | Publish: Jul, 13 2018 04:27:49 PM (IST) Baran, Rajasthan, India

महाविद्यालय खोले तीन साल हो गए ,अब भी कॉलेज खुला जैसे ही हालातों से यहां दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को रू-ब-रू होना पड़ रहा है।

मांगरोल. सरकार को यहां राजकीय महाविद्यालय खोले तीन साल हो गए लेकिन अब भी कॉलेज खुला जैसे ही हालातों से यहां दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को रू-ब-रू होना पड़ रहा है। यहां महाविद्यालय में व्याख्याताओं की नियुक्ति तो की ही नहीं गई। छात्र संगठनों की आवाज भी नक्कारखाने में तूती की तरह ही साबित हो रही है। महाविद्यालय में व्याख्याताओं की नियुक्ति आज तक नहीं की गई है। ऐसे में यहां न विद्यार्थी पढऩे आ रहे हैं और ना ही किसी प्रकार की गतिविधि हो पा रही है। एक अकेले प्रिंसीपल के भरोसे महाविद्यालय संचालित हो रहा है। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है, जो महाविद्यालय का ताला खोल देता है और एक लिपिक कागजी कार्यवाही करता रहता हैं इसके अलावा यहां कोई कामकाज नहीं हो रहा है।
महाविद्यालय के लिए पिछले बरस भूमि आवंटित हो गई वहीं कुछ दिन पहले इसके निर्माण के लिए छह करोड़ की स्वीकृत राशि से निर्माण भी शुरू हो गया लेकिन छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए व्याख्याता अभी तक भी नहीं लगाए गए हैं।
सारे पद खाली
प्राचार्य, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व एक लिपिक के अलावा यहां विभिन्न विषयों के सात व्याख्याताओं, शारीरिक शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, कार्यालय अधीक्षक, सहायक लेखाधिकारी, शीघ्र लिपिक, कनिष्ठ लिपिक, प्रयोगशाला सहायक, प्रयोगशाला वाहक, बुक लिफ्टर, व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद खाली है। यहां महाविद्यालय खुला तब भी यही हालात रहे। प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राएं अपने स्तर पर पढ़ाई कर अगली कक्षा में पहुंच गए। द्वितीय वर्ष में भी प्रवेश हो गया। यहां पिछले बरस प्रथम वर्ष में 193 व द्वितीय वर्ष में 155 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। दो साल से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अव्यवस्थित भवन में ही महाविद्यालय संचालित किया जा रहा है। और अब तीसरे साल भी महाविद्यालय इसी भवन में चल रहा है।
सीटें नहीं बढ़ी
यहां पिछले सालों की तरह 25 प्रतिशत सीटें अब तक भी नहीं बढ़ाई गई हैं। ऐसे में 160 सीटों पर ही दाखिले हो सके हैं। कई छात्र-छात्राएं दाखिले की बाट जोह रहे हैं। कुछ फर्नीचर आया भी है तो वह भी काम नहीं आ रहा। भवन कॉलेज के अनुकूल भी नहीं है।
& महाविद्यालय में रिक्त पदों को लेकर ऊपर कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं।, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं आया है। इस बीच अभी दाखिले के समय यहां दो व्याख्याता लगाए थे। उनमें से अब एक ही अस्थायी तौर पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में यहां कोई व्याख्याता स्थायी तौर पर नहीं है।
नंदलाल मीणा, कॉलेज प्राचार्य

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