
शिवपुरी से आने वाले खरीदार इसको 250 रुपए किलो के भाव से ले जा रहे हैं। बाद में इसी जड़ी की कीमत बाजार में करीब 12 सौ रुपए किलो हो जाती है।
सहरिया महिलाएं जंगल से खोदकर ला रही शतावर
देवरी. क्षेत्र के चौराखाड़ी गांव में इन दिनों सहरिया समाज की महिलाएं जंगल में जाकर मिट्टी से शतावर नामक (विलैया) देशी नाम जड़ को खोदकर ला रही हैं। यहां पर मप्र शिवपुरी से आने वाले खरीदार इसको 250 रुपए किलो के भाव से ले जा रहे हैं। बाद में इसी जड़ी की कीमत बाजार में करीब 12 सौ रुपए किलो हो जाती है। इसके बाद परिवार की सभी महिलाएं उसको छीलती हैं। इसको धूप में किसी बर्तन में रखकर सुखाते है। सूख जाने पर इसे मध्यप्रेश के पोहरी, शिवपुरी के खरीदार गांव आकर ले जाते हैं।
महिलाओं ने बताया कि इसी से उनका गुजर-बसर चल रहा है। इन दिनों खेती-किसानी का काम भी नहीं चल रहा है। अगर फसलों की कटाई का या थ्रेङ्क्षसग का काम भी नहीं चल रहा है तो ऐसे में अभी सहरिया परिवार लोग के सदस्य बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। वहीं गांव की महिलाएं नीलम, रंजीत, अमृत, फूलवती, कमलेश, पूजा आदि महिलाओं ने बताया कि इन दिनों हम लोग बेरोजगार बैठे हैं। कोई रोजगार नहीं मिल रहा है। इसलिए हम लोग सुबह से ही जंगल में निकल जाते हैं और जमीन के अंदर से इस शतावर नामक (विलैया) जड़ को निकालते हैं और घर लाते हैं।
शिवपुरी के व्यापारी कर रहे खरीद
सहरिया समाज की महिलाओं ने बताया कि शतावर नामक जड़ को जमीन से खोदने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसे जंगल से खोदकर छीलकर सुखाकर एक किलोग्राम के 250 रुपए मिल जाते हैं। घर पर ही खरीदार आते हैं और खरीद कर ले जाते हैं।
शतावर के चूर्ण को खाने के तरीके
आयुर्वेदिक चिकित्सक के अनुसार इस चूर्ण को खाली पेट दूध मिश्री के साथ एक छोटी चम्मच सुबह शाम खाने से शारीरिक कमजोरियां दूर होती हैं।
Published on:
14 Feb 2025 11:41 am
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