
रोजगार की तलाश में बैलों की जगह गाड़ी में जुतकर निकले लुहार दम्पती
सीसवाली. राज्य सरकार भले ही गरीबों के उत्थान के लिए करोड़ों रुपए की कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, लेकिन यह धरातल पर जरूरतमंद तक नहीं पहुंच रही। ऐसा ही वाक्या मंगलवार को पास ही रायथल गांव में देखने को मिला, जहां बैल नहीं होने के कारण गाडिय़ा लुहार दम्पती खुद ही जुतकर गाड़ी को खींचते नजर आए। गाड़ी पर उनके भूखे-प्यासे बच्चे बैठे थे। मांगरोल तहसील के सौकंदा से पत्नी के साथ कंधों पर गाड़ी खींच कर ला ररहे सादाराम ने बताया कि वे रोजगार के लिए एक गांव से दूसरे गांव खानाबदोश की तरह घूमते रहते हैं। वह कुछ माह पहले रोजगार के लिए सौकंदा गया था। उसका परिवार लम्बे समय से सीसवाली में सड़क किनारे अस्थाई डेरा बनाकर रह रहा है। उनके पास गाड़ी है, लेकिन उनके लिए बैल खरीदने के पैसे नहीं है। यदि किसी तरह बैल खरीद भी लिया तो परिवार के लिए ही रोटी बड़ी मुश्किल से जुटा पा रहे है। बैलों के लिए भूसा-चारा कहां से लाएंगे। सादाराम से सरकार की योजनाओं के बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि राशन कार्ड होने के बावजूद उसके जैसे कई गाडिय़ा लुहार परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। मकान के अभाव में उन्हें सड़क किनारे डेरे बनाकर रहना पड़ रहा है। सादाराम ने बताया कि उसका परिवार तीस साल पहले कोटा में रहता था। वहां रोजगार नहीं मिलने वे सीसवाली आ गए। अब यहां भी काम मिलना कम हो गया तो छोटे गांवों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
- ऐसे परिवारों को कई सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इस मामले को बुधवार को दिखवा कर उचित कार्यवाही की जाएंगी। यदि किसी कर्मचारी की कोताही मिली तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
नरेन्द्र गुप्ता, जिला कलक्टर
Published on:
29 Aug 2023 10:09 pm

बड़ी खबरें
View Allबारां
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
