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शाहाबाद क्षेत्र में कुंडा व माधो खोह के जंगलों के मध्य दो बघेरों का बसेरा

बारां जिले में वन्य जीव गणना से पहले ही वन विभाग की खुशी मिल गई थी, हालांकि गणना के दौरान कई दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीव नजर आने से वन एवं गणनाकर्मी खासे उत्साहित रहे।

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शाहाबाद क्षेत्र में कुंडा व माधो खोह के जंगलों के मध्य दो बघेरों का बसेरा

बारां जिले में वन्य जीव गणना से पहले ही वन विभाग की खुशी मिल गई थी, हालांकि गणना के दौरान कई दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीव नजर आने से वन एवं गणनाकर्मी खासे उत्साहित रहे। जिले में वन्य जीव गणना बुद्ध पूर्णिमा शनिवार सुबह आठ बजे शुरू होकर रविवार सुबह आठ बजे तक पूरे चौबीस घंटे चली थी, लेकिन से इससे एक पहले शुक्रवार को ही शाहाबाद के सघन जंगल में स्थित कुंडा खोह के निकट ग्रामीणों को दो बघेरे (तेंदुए) नजर आए थे, इसके बाद अधिकारियों ने ग्रामीणों की जानकारी की विभागीय तौर पर पुष्टि की। क्षेत्र में दो बघेरों की उपस्थिति से वन अधिकारी खुश रहे। इनका कहना था कि इस सघन में स्थित कुंडा खोह व माधो खोह में बारह माह जल भराव रहता है तथा पिछले कई बरसों से इस क्षेत्र में एक से दो बघेरों की मौजूदगी समय-समय पर प्रमाणित होती रही है।

शिकारी बाज भी आया है नजर
जिले में हुई वन्य जीव गणना के दौरान कृष्ण मृग, चिंकारा, जरख, सियार, लोमड़ी, विलुप्त हो रहे गिद्ध, शिकारी पक्षी बाज, लंगूर समेत नील गाय, मोर समेत कई प्रकार के वन्य जीव नजर आए थे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अभी वन्य जीव गणना के आंकड़े संग्रहित किए जा रहे हैं। इसके बाद सभी वाटर हॉल की वन्य जीवों की संख्या शामिल कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद ही जिले की जानकारी अधिकृत रूप से सार्वजनिक की जा सकेगी। जलवाड़ा वन क्षेत्र में शिकारी बाज पक्षी के दिखाई देने भी वन विभाग के कर्मचारी खासे खुश हैं तो जिले में गिद्धों के कुनबे भी दिख रहे हैं, जबकि देश में गिद्ध लुप्त हो रहे हैं।

जिले में बनाए थे १०६ वाटर हॉल
वन विभाग ने जिले में बुद्ध पूर्णिमा को वन्य जीवों की गणना के लिए १०६ वाटर हॉल बनाए थे। इन पर वन्य जीव गणना के लिए २०६ वनकर्मी व स्वयंसेवक तैनात किए गए थे। गणना का कार्य रविवार सुबह आठ बजे पूरा हो गया था। इस चौबीस घंटे की अवधि में गणना के लिए लगाए गए वनकर्मी व स्वयसंवक पूरी तरह मुस्तैद रहे।

जिले के शाहाबाद वन क्षेत्र में कुडा खोह के निकट ग्रामीणों ने वन्य जीव गणना शुरू होने से पहले दो तेंदुए देखे थे। ग्रामीणों की सूचना की तस्दीक हो गई हे। वैसे इस क्षेत्र के कुंडा खोह व माधो खोह में पिछले कई बरसों से तेंदुओं की मौजूदगी प्रमाणित होती रही है। यह पूरा इलका सघन वन क्षेत्र है।
दीपक गुप्ता, सहायक वन संरक्षक बारां