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कूनो की धीरा को मिला नया घर, छलांग लगाकर जंगल में ओझल

केलवाड़ा कस्बे से विशेष प्रोटोकॉल के साथ वन विभाग की टीम गुजरी। बुधवार शाम को धीरा को गांधीसागर अभयारण्य में रिलीज कर दिया गया। कैज का दरवाजा खुलते ही धीरा छलांग लगाकर झाडिय़ों में ओझल हो गई।
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बारां

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Mukesh Gaur

Sep 18, 2025

केलवाड़ा कस्बे से विशेष प्रोटोकॉल के साथ वन विभाग की टीम गुजरी। बुधवार शाम को धीरा को गांधीसागर अभयारण्य में रिलीज कर दिया गया। कैज का दरवाजा खुलते ही धीरा छलांग लगाकर झाडिय़ों में ओझल हो गई।

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श्योपुर से मंदसौर जिले में किया ट्रांसलोकेट, जिले से होकर गुजरा कारवां

केलवाड़ा/ बारां. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75 में जन्मदिन के अवसर पर मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से धीरा नाम के चीते को बुधवार को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य ट्रांसलोकेट किया गया। चीते को लेकर वाहनों का कारवां जिले के केलवाड़ा होकर गुजरा। केलवाड़ा कस्बे से विशेष प्रोटोकॉल के साथ वन विभाग की टीम गुजरी। बुधवार शाम को धीरा को गांधीसागर अभयारण्य में रिलीज कर दिया गया। कैज का दरवाजा खुलते ही धीरा छलांग लगाकर झाडिय़ों में ओझल हो गई।

ऐसे पूरा हुआ सफर

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से करीब 200 किलोमीटर से अधिक दूरी का सफर तय कर चीता गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य पहुंची। वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि इस दौरान जिले के वन विभाग की निगरानी में चीतों को केलवाड़ा से नेशनल हाइवे 27 से सीमलिया टोल प्लाजा तक ले जाया गया। यहां से कुछ आगे कराडिय़ा से गुजर रहे मुंबई-वडोदरा-दिल्ली एक्सप्रेस वे लाया जाएगा। यहां से कोटा जिले की वन विभाग टीम अपनी निगरानी में चीते को गांधीसागर तक ले जाएगी। वे सिमलिया से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से ले जाए जाएंगे। धीरा नाम के नामीबियाई चीते को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से स्थानांतरित किया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इसी मार्ग से होकर दो चीतो को गांधीसागर ले जाया जा चुका है। वहां पर अभयारण्य में इनके लिए बड़ा क्लोजर बनाया गया है। यहां पर कुछ दिन तक इन चीतों को रखकर खुले जंगल में छोड़े जाने की योजना है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के कूनो को देश में अफ्रीकी चीतों का पहला आवास माना जाता है।

क्या है चीता कॉरिडोर परियोजना

चीता कॉरिडोर परियोजना भारत में पहले अंतर-राज्यीय वन्यजीव कॉरिडोर के लिए एक रुकी हुई, लेकिन महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य मध्यप्रदेश में कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और राजस्थान में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बीच पुन: स्थापित चीतों के विचरण के लिए17,000 वर्ग किलोमीटर का संरक्षित आवास बनाना है। हालांकि राजस्थान के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) की योजना बनाई गई थी, लेकिन मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने पहले अपनी सीमाओं के भीतर चीतों की आबादी को स्थिर करने, कूनो और गांधी सागर में संरक्षण प्रयासों को प्राथमिकता देने और व्यापक प्रोजेक्ट चीता के भीतर चुनौतियों का समाधान करने के लिए परियोजना को फिलहाल रोक दिया है।

मुख्य बातें

लक्ष्य: पुन: स्थापित चीतों के प्राकृतिक और मुक्त आवागमन के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान में संरक्षित आवासों को जोडऩा।

क्षेत्रफल: प्रस्तावित कॉरिडोर 17,000 वर्ग किमी में फैला है, जिसमें 10,500 वर्ग किलोमीटर मध्य प्रदेश में और 6,500 वर्ग किलोमीटर राजस्थान में है।

प्रमुख स्थान: परियोजना में कुनो राष्ट्रीय उद्यान, गांधी सागर अभयारण्य (दोनों मध्य प्रदेश ) व मुकुंदरा हिल्स टाइगर रि•ार्व (राजस्थान) शामिल हैं।

परियोजना की स्थिति: वर्तमान में स्थगित, क्योंकि मध्य प्रदेश अपने मौजूदा राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में चीतों की आबादी को स्थिर और बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहा है।

यह स्थगित क्यों है

संरक्षण पर ध्यान: अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि मध्य प्रदेश के मौजूदा स्थलों में चीते फल-फूल रहे हों और उनकी अच्छी तरह से स्थापना हो, उसके बाद ही उनके क्षेत्र का और विस्तार किया जाए।

जनसंख्या को स्थिर करना: परियोजना की प्रगति कुनो और गांधी सागर में चीतों की आबादी के सफल स्थिरीकरण और वृद्धि से जुड़ी है।

अभूतपूर्व परिस्थितियां: राजस्थान के साथ समझौता ज्ञापन को रोकने के मध्यप्रदेश के निर्णय को अभूतपूर्व परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जो आंतरिक चुनौतियों या संरक्षण प्राथमिकताओं के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता का संकेत देता है।