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सुनो पुकार, घर-घर विराजित हों ईको फ्रेंडली गणपति इस बार

समय के साथ खुद को बदलें और त्योहार को ईको फ्रेंडली मनाएं। मूर्तियां सिर्फ मिट्टी की बनी हों, उन्हें ही स्थापित करें और केवल घुलनशील व प्राकृतिक पूजन सामग्री का ही विसर्जन करें।

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बारां

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Mukesh Gaur

Sep 02, 2024

समय के साथ खुद को बदलें और त्योहार को ईको फ्रेंडली मनाएं। मूर्तियां सिर्फ मिट्टी की बनी हों, उन्हें ही स्थापित करें और केवल घुलनशील व प्राकृतिक पूजन सामग्री का ही विसर्जन करें।

समय के साथ खुद को बदलें और त्योहार को ईको फ्रेंडली मनाएं। मूर्तियां सिर्फ मिट्टी की बनी हों, उन्हें ही स्थापित करें और केवल घुलनशील व प्राकृतिक पूजन सामग्री का ही विसर्जन करें।

इस त्योहार पर करें पहल : कई सामाजिक संस्थाएं, स्कूल व कॉलेज दे रहे प्रकृति संरक्षण का संदेश

festival news : बारां. फेस्टिवल्स कोई भी लेकिन नेचर को नुकसान न हो, इस बात का ध्यान भी रखना होगा। आने वाले दिनों में कई ऐसे त्योहर आएंगे जो उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ सभी मनाएंगे। इस दौरान हमारे जलाशयों में बड़ी मात्रा में घरों से निकली पूजन सामग्री और मूर्तियों का विसर्जन होगा। जिससे वे दूषित होने के साथ विषैले भी हो जाते हैं। इसलिए समय के साथ खुद को बदलें और त्योहार को ईको फ्रेंडली मनाएं। मूर्तियां सिर्फ मिट्टी की बनी हों, उन्हें ही स्थापित करें और केवल घुलनशील व प्राकृतिक पूजन सामग्री का ही विसर्जन करें।

सीखना होगा प्रकृति गणेश बनाना

प्रथम पूज्य गजानन के प्रति सभी में गहरी आस्था है। गणेशोत्सव पर्व पर घर-घर गणेश प्रतिमा की स्थापना की जा रही है। ऐसे में इनमें प्रयोग किए जा रहे रसायन और विसर्जन पर होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए आने वाले समय में मिट्टी के गणेश की प्रतिमा अथवा अन्य ईको फ्रेंडली प्रतिमाओं की स्थापना पर विचार करना होगा। प्रकृति प्रेमी और शहर की कई सामाजिक संस्थाएं इस प्रकार की पहल कर रही हैं, जिनमें गणेश प्रतिमा को मिट्टी, गोबर, व अन्य प्राकृतिक चीजों से बनाया जा रहा है। पूजन के बाद इनका विधि विधान से घरों में ही विसर्जन किया जाता है। शहर में कई कॉलेज व स्कूलों में भी इस प्रकार के वर्कशॉप व कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें छात्रों को मूर्ति निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि प्रकृति को बचाया जा सके।

पीओपी से नुकसान

पॉल्यूशन बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि पीओपी से बनी मूर्तियों से पानी में रहने वाले जीवों को नुकसान तो होता ही है, वह सालों तक नहीं घुलता है। जो संपर्क में आने वाले इंसानों व जानवरों को भी हानि पहुंचाता है। इंसानों में स्किान से संबंधित बीमारियां होती हैं, वहीं मवेशियों में गंभीर बीमारियां पैदा हो जाती है। इसलिए बैन लगाया गया है। मिट्टी से बने गणेश जी ही स्थापित करें, इसके लिए अभियान भी चलाया जा रहा है।

रंगों से पानी खराब

भूजलविद् कहते हैं कि मूर्तियों को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए कैमिकल युक्त रंगोंं का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिन्हें जलाशयों व नदियों में विसर्जित किया जाता है। जिससे पानी न केवल प्रदूषित होता है, बल्कि जहरीला भी हो जाता है। इससे पानी में रहने वाले जीवों को जान का खतरा भी होता है। इसलिए जितना हो सके प्राकृतिक रंगों व मिट्टी से बनी प्रतिमाएं ही घर पर लेकर आएं। ताकि आने वाले कल के लिए प्रकृति का संरक्षण हो सके।

हमारे पुराणों और ग्रंथों में मिट्टी को बहुत ही पवित्र माना गया है। मूर्ति बनाते समय अगर उसमें कुछ टुकड़े फिटकरी के भी डाल दें तो विसर्जन के बाद नदी, तालाबों का पानी शुद्ध हो जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण व प्रदूषण की रोकथाम में हम कुछ मदद कर सकेंगे।
टीना कुमारी, गृहिणी, अटरू

राजस्थान पत्रिका की ओर से यह पहल सराहनीय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हल्दी व सुपारी को अहम माना गया है। श्री गजानन भगवान के रूप में सुपारी व हल्दी की पूजा भी की जाती है। प्रकृति से प्राप्त सामग्री द्वारा गणेश प्रतिमा बनाई जाए तो वातावरण शुद्ध रहेगा।
कविता जैन, गृहिणी किशनगंज

मुंबई जैसी जगहों पर रासायनिक पदार्थ से निर्मित भगवान गणेश की प्रतिमा, जिसका वजन अनुमान कुंटलों में होता है। वहां भी इसका चलन जोरों-शोरों पर है। राजस्थान पत्रिका का पर्यावरण के प्रति समर्पित संरक्षण श्रद्धा पूरे विश्व भर में सकारात्मक संदेश प्रेषित करेगा।
सुनीता कुमारी, बारां

इस पहल पर हमारे माध्यम से सर्व समाज को यह संदेश दिया जाएगा। यह अभियान हमें प्रकृति से जोड़ेगा। बल्कि यह पर्यावरण संतुलन के लिए भी हितकारी होगा। ईको फ्रेंडली गणेशजी बल्कि आधुनिकता में भी प्रकृतिमित्र की भूमिका निभाएंगे।
ममता पोटर, गृहिणी बारां

पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सभी को प्राकृतिक सामग्री से गणेश प्रतिमा बननी चाहिए। पेड़ के पत्तों, सूखे मेवे से इन्हें सजाया जा सकता है। ऐसी प्रतिमाओं से पर्यावरण व जल प्रदूषित नहीं होगा। सभी को राजस्थान पत्रिका जेसी पहल करनी चाहिए।
हर्षिता चौधरी, गृहिणी, किशनगंज