600 तरह की जड़ी बूटियां हैं जंगलों में
क्षेत्र के जंगलों में कई तरह की जड़ी बूटियां हैं। इनमें से कई ऐसी हैं जो अन्य स्थानों पर नहीं पाई जाती। इनके संरक्षण की जरूरत है। इनमें सेमल, नागबला, वाराही कंद, कुसुम, कुटज, बांझ ककोड़ा, कठबेर, लता, बदर, नोनी द्रोणपुष्पी, शितिवार, माईमौसा हिमालयाना, मार्सडेनिया, टर्मिनलिया टोमेंटोसा, ज्योतिषमति, सालपर्णी, गोजिह्वा, पाषाणभेद, कलिहारी बलाभूमिबला, जीवंती, पुत्रजीवक, बड़ी गुग्गुलु हल्दु, बड़ी कटेरी, एम्पेलोसिसस लाटीफ ोलिया, सिसस रेपण्डा, बालसमीना, कालीजीरी रिक्सिया शामिल हैं।
उम्रदराज सहरिया लोगों को जानकारी
सहरिया समाज के उम्रदराज लोग इनके सेवन से प्रतिकूल मौसम का आसानी से सामना कर लेते हैं। कड़ाके की ठण्ड में कम कपड़ों में गुजारा और तेज गर्मी में सरलता से जीवन यापन कर लेते हैं। इन जड़ी.बूटियों के ज्ञान व प्रचार प्रसार से इस क्षेत्र की दिशा व दशा बदली जा सकती है।