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बारां के जंगल में नहीं हो रहा मंगल

किशनगंज व शाहाबाद उपखंडों में एक हजार वर्ग किमी का सघन वन क्षेत्र, जिले में लम्बे समय से पैंथर की मौजूदगी के बाद भी नजरें नहीं हो रही इनायत

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बारां के जंगल में नहीं हो रहा मंगल

बारां के जंगल में नहीं हो रहा मंगल


बारां. जिले के किशनगंज व शाहाबाद उपखंड स्थित सघन जंगल को भले ही राज्य व केन्द्र सरकारें सेंचुरी का दर्जा देने के प्रस्ताव के धूल नहीं झाड़ रहीए लेकिन प्राकृतिक संतुलन जिले के इस सघन वन क्षेत्र को प्रदेश के रणथम्भौर व पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश की कूनो पालपुर सेंचुरी का सुरक्षित कॉरीडोर बनाने की दिशा में मुफीद साबित हो रहा है। वन विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि मौजूदा रफ्तार से शाहाबाद व किशनगंज क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ती रही तो आने वाले पांच सालों में यह समूचा क्षेत्र अघोषित रूप से देश में एक और नई सेंचुरी बन जाएगा। शाहाबाद के जंगलों में बरसों से पैंथर की मौजूदगी प्रमाणित हो रही है। मध्यप्रदेश के कूनो पालपुर में पैंथर की मौजूदगी के बाद अब वहां चीते (लैपर्ड) लाने की तैयारियां अन्तिम चरण में हैं तो सवाईमाधोपुर जिले की रणथम्भौर को टाइगर के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। सेंचुरी नहीं तो भी कॉरीडोर बनने से बारां जिले के आदिवासी अंचल व सघन वन क्षेत्र न केवल समृद्ध होगा वरन् यहां के विकास को पंख भी लग जाएंगे।

रणथम्भौर और कूनो पालपुर से है बड़ा
वन विशेषज्ञ बताते हैं कि के शाहाबाद, किशनगंज क्षेत्र का सघन वन सवाईमाधोपुर के रणथम्भौर व मध्यप्रदेश के कूनो पालपुर को मिलाने के बाद भी बड़ा है। यहां करीब एक लाख हैक्टेयर वन भूमि ऐसी है, जिसमें इंसानी दखल न के बराबर है। यह क्षेत्र रामगढ़ क्रेटर से शाहाबाद के सहरोल तलहटी तक है। ऐसे में रणथम्भौर, कूनो पालपुर और शिवपुरी के माधव राष्ट्रीय उद्यान से टाइगर, तेंदुए व अन्य जीव आसानी से यहां पहुंचने लगेंगे। प्राकृतिक व भौगोलिक परिस्थितियों अब और अनुकूल हो गई हैं। कुनो पालपुर सेंचुरी शाहाबाद से होकर जाने वाली कुनु नदी से जुड़ी है तो रणथम्भौर से टाइगर आसानी से कूनो पालपुर तक पहुंच जाते हैं।

के रामगढ़ क्रेटर से शाहाबाद तलहटी तक लगभग एक लाख हैक्टेयर में सघन वन है तथा यहां इंसानी दखल भी कम है। भौगोलिक रूप से यह परिस्तिथियां खासी अनुकूल है। बाघए तेंदुए व पैंथर सांभरए चिंकारा व चीतल जैसे शाकाहारी वन्य जीवों को चाव से खाते हैं। ऐसे में जिले के शाहाबाद व किशनगंज क्षेत्र में इन्हें लाया जाना चाहिए। जिले का यह वन क्षेत्र सीधे भूभाग में होने से इसकी सुरक्षा को लेकर बहुत अधिक प्रबंध करने की जरूरत भी नहीं है। किशनगंज क्षेत्र के रामगढ़ स्र5टर को विश्व धरोहर में शामिल किए जाने के बाद अब इसे मांगरोल, कोटा से जोडने के लिए हाई लेवल ब्रिज का निर्माण होने पर रणथम्भौर के बाघों के लिए भी सीधे रास्ता खुल जाएगा। वर्ष 2014 में रणथंभौर से एक बाघ का मूवमेंट बारां जिले के अंता व इससे सटे कोटा जिले के सुल्तानपुर इलाके में चंबल नदी के किनारे रहा है। 2016 में इसकी मौत हो गई।

शाहाबाद और किशनगंज क्षेत्र के लगभग एक हजार वर्ग किमी वन में प्राकृतिक व भौगोलिक परिस्थितियां खासी अनुकूल है। इसे सेंचुरी का दर्जा देने का प्रस्ताव भेजा हुआ है। सरकार अभयारण्य व राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा देने से पहले सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कराती है। किशनगंज व शाहाबाद के जंगल वन्यजीवों के आवास के लिए सुरक्षित हैं।
दीपक गुप्ता
सहायक वन संरक्षक, बारां