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न मंडी शुरु हुई न सरकारी तौल केंद, गौण है कृषि उपज मंडी में सुविधाएं

किसानों के लिए यहां पर न तो सरकारी तौल कांटे की व्यवस्था है और न ही गौण मंडी की व्यवस्था।

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हरनावदाशाहजी. बारां जिले के आखरी छोर पर स्थित होने के कारण झालावाड़ जिले के साथ पड़ौसी राज्य मध्यप्रदेश के गांवों तक से अपनी उपज बेचने के लिए आने वाले किसानों के लिए यहां पर न तो सरकारी तौल कांटे की व्यवस्था है और न ही गौण मंडी की व्यवस्था।
ऐसे में किसानों को उपज को खुले बाजारों में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। कस्बे में कृषि उपज मंडी की बोली प्रक्रिया सालों से बंद है। पूर्व में यहां पर बोली लगती थी और बड़ी मात्रा में जिंसों की खरीद फरोख्त होती थी। धीरे-धीरे बोली प्रक्रिया बंद हो गई, तब से मंडी का सारा कामकाज कागजों में ही सिमट कर रह गया। लोगों का कहना है कि सरकार का क्षेत्र के किसानों की परेशानियों को लेकर कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में इस बार यहां पर न तो सरकारी तौल कांटे की कोई व्यवस्था की गई है और न ही गौण मंडी का काम पूरा करवाया गया। ऐसे में किसानों को उपज के लिए भटकने जैसी परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
होने है कई काम
कस्बे में गौण मंडी के लिए करीब पचास लाख रुपए की लागत से गौण मंडी की चारदीवारी एवं चैक पोस्ट तो तैयार हुए छह माह हो चुके है, लेकिन उसके आगे के काम नहीं हो पाए।
जिससे किसानों को काम शुरु होने का इंतजार है। मंडी सचिव मनोज मीणा ने बताया कि एप्रोच रोड, कार्यालय भवन समेत कई काम और होने बाकी है। जिसमें अभी थोड़ा समय लगेगा। जबकि चारदीवारी बनने के बाद जगह वीरान ही पड़ी है। किसानों का कहना है कि गौण मंडी का सुव्यवस्थित संचालन शुरू होना चाहिए।
काश्तकारों के लिए मंडी के नाम पर सुविधाएं गौण होने से कस्बे में उपज बेचने के लिए आने वाले किसान भी अब यहां से बेरुखी दिखाकर उपज बेचने के लिए आसपास के दूसरे कस्बों की ओर जाने लगे है। जिसका सीधा असर यहां के साहूकारों पर भी पडऩे लगा है। जानकार लोगों का कहना है कि बाजार की रौनक काश्तकारों की भीड पर ही निर्भर करती है। ऐसे में यहां पर साहूकारा सुधारने के लिए सरकारी प्रयास करने की जरुरत है।
क्षेत्र के लोगों ने कस्बे में उपज खरीदने के लिए सरकारी तौल कांटा लगाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिए जाने से क्षेत्र के किसानों पर कुठाराघात हो रहा है।
बारां. शहर समेत जिले में शनिवार दोपहर को तेज धूप व लू के थपेड़ों से लोगों का बुरा हाल रहा। गर्मी से बचाव के लिए लोगों ने शीतल पेय पदार्थो का सहारा लिया। अधिकतम तापमान ४४ व न्यूनतम ३१ डिग्री सेल्सियस रहा। जिले में पिछले दो-तीन दिनों से गर्मी का असर बढऩे के साथ लोग पूरी एहतियात बरतने लगे हैं। शनिवार को हाइवे पर दोपहर के समय वाहनों की आवाजाही कम रही।