
राजस्थान के बारां जिले के छीपाबड़ौद थाने में हिरासत में रखे गए एक जने की गुरुवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने उसकी पुलिस हिरासत में मौत होने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया और शव लेने से इनकार कर दिया।
सूचना पर जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे तथा समझाइश का प्रयास किया। परिजनों ने घटना की न्यायिक मजिस्ट्रेट से जांच कराने और उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग को लेकर जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया गया। फिर जाकर करीब आठ घंटे बाद मामला शांत हुआ। शाम करीब साढ़े पांच बजे शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश चौधरी ने बताया कि बुधवार रात गोरधनपुरा गांव निवासी एक युवक ने शिकायत दी थी। उसने अपने पिता हरिप्रसाद उर्फ हरिया उर्फ हरीश वाल्मीकि (45) पर नशे की हालत में मारपीट करने आरोप लगाया गया था। इस पर पुलिस ने हरीश को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया।
देर रात हरीश ने पेट दर्द की शिकायत की तो उसे पुलिस ने कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर दिखाया गया। वहां दवा लेने के बाद तबीयत ठीक हो गई तथा पुलिस वापस थाने ले आई। गुरुवार सुबह हरीश ने सीने दर्द की शिकायत की तो उसे वापस अस्पताल ले गए। जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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हरीश की मृत्यु की सूचना पर परिजन अस्पताल पहुंचे। उसका शव देखते ही परिजनों में आक्रोश छा गया। उन्होंने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए शव लेने से इंकार कर दिया। परिजनों का कहना था कि हरीश को स्वस्थ हालत में पुलिस लेकर गई थी। समझाइश के बाद परिजनों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया। इसमें परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी, 50 लाख की आर्थिक सहायता व दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
Published on:
08 May 2025 06:33 pm

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