
हरे भरे पेड़ों को इतनी बड़ी मात्रा में विकास के लिए बली देना उचित नहीं है इस प्लांट को लेकर स्थानीय लोग भी विरोध में है और जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप करने के लिए अनुरोध किया जाएगा ।
प्रधानमंत्री और सीजेआई तक पहुंचाएंगे संदेश, वनों को मत कटने दो
अटरू. अटरू क्षेत्र के कुन्जेड ग्रामवासियों ने पूर्व सरपंच व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत पाटनी के नेतृत्व में शाताबाद घाटी के बीच एक हजार वर्ष पुराने घने जंगल में एक लाख हरे-भरे दुर्लभ जड़ी बूटियां से भरपूर पेड़-पौधों को काटकर प्लांट लगाने का विरोध किया है। इसके तहत सोमवार को प्रधानमंत्री व भारत के मुख्य न्यायाधीश को पोस्टकार्ड के माध्यम से संदेश दिया गया। इसमें जंगल बचाओ की मुहिम चलाकर गुहार लगाई जा रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता पाटनी ने बताया कि शाहाबाद घाटी के बीच सघन जंगल में 1 लाख 19 हजार 759 सौ हरे-भरे दुर्लभ जड़ी बूटियां से भरपूर पौधों काटकर 1800 मेगावाट का हाइड्रो पावर प्लांट स्थापित करने के लिए 407 हैक्टेयर फॉरेस्ट लैंड और 216 हैक्टेयर अन्य भूमि पर 10000 करोड़ रुपए से प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसको लेकर ग्रामवासियों के सहयोग से जंगल बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए एक नई एम मुहिम चला कर गांव से 1000 नागरिकों के पोस्टकार्ड प्रधानमंत्री तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखवाए जा रहे हैं। अभियान के तहत स्वामी विवेकानंद स्कूल के विद्यार्थियों के बीच में जाकर छात्र-छात्राओं से शुरुआत करवा कर छात्र-छात्राओं द्वारा पोस्टकार्ड पर जंगल बचाने के लिए अलग-अलग प्रकार के चित्र बनाकर शाहबाद के जंगल को बचाने के लिए पोस्टकार्ड के माध्यम से संज्ञान लिए जाने की गुहार लगाई जाएगी।
हरे भरे पेड़ों को इतनी बड़ी मात्रा में विकास के लिए बली देना उचित नहीं है इस प्लांट को लेकर स्थानीय लोग भी विरोध में है और जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप करने के लिए अनुरोध किया जाएगा ।
पवन गंदोलिया, पर्यावरण प्रेमी
शाहाबाद के घने जंगल में एक लाख से अधिक पौधे कटवा कर जब बिजली के प्लांट को स्थापित करने की जानकारी मिली तो बड़ा दुख हुआ। इसको लेकर इस संबंध में हर स्तर पर शिकायत करेंगे।
रामेश्वर नागर, पटना सरपंच
इतनी बड़ी मात्रा में पेड़ काटने से यहां का प्राकृतिक सौंदर्य के साथ जंगल नष्ट हो जाएगा वन विभाग अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इसे बचाने का प्रयास करते हैं। राजनीतिक दबाव में स्वीकृति दी जा रही है।
सुरेश अदलक्खा, पर्यावरण प्रेमी
पेड़ों की कटाई कर बिजली उत्पादन उचित नहीं है, बिजली और विकास जरूरी है, लेकिन पेड़ हमें बचाने ही होंगे. यह जंगल खत्म हो जाएंगे तो हमारी आबोहवा पूरी तरह से प्रदूषित हो जाएगी।
महेंद्र कुमार अदलक्खा, पार्षद
Published on:
29 Oct 2024 01:00 pm
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