
प्रदूषण फैलाने के मामले में आरएसपीसीबी ने छबड़ा थर्मल को दिया नोटिस
छबड़ा थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख व पानी आम लोगों के जीवन में जहर घोल रहे है। क्षेत्र में विकास और रोजगार का वादा करने वाला यह पावर प्लांट लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। सीटीपीपी प्रशासन की इस लापरवाही के चलते राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने नोटिस जारी कर दिया है। इधर, छबड़ा थर्मल पावर प्लांट की मुख्य अभियंता संगीता श्रृंगी ने बताया कि राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा जारी नोटिस का जवाब बनाकर भिजवा दिया है। नोटिस में बताई गई कमियों को सुधार लिया गया है। बोर्ड के संबंधित अधिकारी दोबारा आकर जांच करवा सकते हैं।
गत दिनों छबड़ा थर्मल पावर प्लांट का आरएसपीसीबी टीम ने निरीक्षण किया था। टीम ने पाया कि प्लांट से पार्वती नदी में तीतरखेड़ी की तरफ एक नाला जाता है, इसका दूषित पानी पार्वती नदी में गिरता है। इससे नदी का पानी दूषित हो रहा है। साथ ही आरसीसी सायलो व एश डाइक से राख का निस्तारण सही से नहीं कर पाना, बगैर पर्यावरण मंजूरी मल्टी बनाकर फ्लैट निर्माण, थर्मल प्लांट क्षेत्र के आस-पास राख प्रदूषण, कोल क्रेशर से प्रदूषण आदि अनियमितताएं पाई गई। इस पर आरएसपीसीबी ने सीटीपीपी को वॉटर एक्ट 1974, एयर एक्ट 1981, एनवायरमेन्ट प्रोटेक्शन एक्ट 1986, ईआईए नोटिफिकेशन आफ 2006 का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी कर लगभग दो करोड़ की पेनल्टी प्रस्तावित की है।
बढ़ रही बीमारियां
छबड़ा सरकारी अस्पताल व थर्मल प्लांट के पास स्थित डिस्पेंसरी में अस्थमा, एलर्जी व स्किन डीजीज के मामले आ रहे हैं। दो साल में साढ़े चार हजार मरीज यहां पहुंचे। डिस्पेंसरी में भी 2000 से ज्यादा मरीज आए। भटखेड़ी के राधेश्याम ने बताया कि राख उड़ कर फसलों पर आती है, इससे हाथों पर खुजली हो गई। अब त्वचार उतरने लगी है। 20 किसान परिवार पीडि़त है। तीतरखेड़ी सरपंच रेखाबाई ने बताया कि राख से जमीन बंजर हो रही है। प्लांट से उड़ रही राख से 80 प्रतिशत फसल खराब हो जाती है। भूमि अवाप्ति के समय सीएसआर फंड से प्लांट क्षेत्र के आस-पास स्थित गांवों में विकास करवाना था। परंतु आज तक इन गांवों को सीएसआर फंड का लाभ नहीं मिला है।
Published on:
15 Mar 2024 11:03 pm
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