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तालाब और बांध जोह रहे बरसात की बाट

बारां. जिले में प्री-मानसून के तहत भले ही अब तक औसत 92 मिमी (करीब चार इंच) बारिश हो युकी है, लेकिन इस दौर में कुछ ही बांध व तालाबों में ङ्क्षसचाई के लिए पानी की आवक हो सकी है। जिले में ऐसे 18 बांध व तालाब हैं, जिनसे खरीफ के बाद रबी की फसलों की बुवाई व ङ्क्षसचाई होती है।

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तालाब और बांध जोह रहे बरसात की बाट

तालाब और बांध जोह रहे बरसात की बाट

बारां. जिले में प्री-मानसून के तहत भले ही अब तक औसत 92 मिमी (करीब चार इंच) बारिश हो युकी है, लेकिन इस दौर में कुछ ही बांध व तालाबों में ङ्क्षसचाई के लिए पानी की आवक हो सकी है। जिले में ऐसे 18 बांध व तालाब हैं, जिनसे खरीफ के बाद रबी की फसलों की बुवाई व ङ्क्षसचाई होती है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जिले में मानसून सक्रिय नहीं हुआ है। ऐसे में जल संग्रहण क्षेत्रों की प्यास भी नहीं बुझी है। ऐसे में ङ्क्षसचाई स्रोतों में पानी की आवक नहीं हो रही। जबकि गत वर्ष जिले में अतिवृष्टि के हालात बनने से सभी ङ्क्षसचाई व पेयजल स्रोत लबालब होकर छलक गए थे। इनसे रबी की फसलों की ङ्क्षसचाई को संबल मिला था तथा गेहूं ही नहीं लहसुन की फसल की ङ्क्षसचाई में भी आसानी रही थी।
76 हजार हैक्टेयर में होती है ङ्क्षसचाई
जल संसाधन विभाग के सूत्रों के अनुसार जिले में सात लिफ्ट ङ्क्षसचाई परियोजनाओं के अलावा 18 छोटे-बड़े बांध व तालाब हैं। बांध व तालाबों से लगभग 51 हजार हैक्टेयर जमीन ङ्क्षसंचित होती है। जबकि सात लिफ्ट परियोजनाओं से लगभग 25 हजार हैक्टेयर जमीन में फसलों की प्यास बुझती है। इनके अलावा चम्बल की दायीं मुख्य नहर से अन्ता, मांगरोल व बारां तहसीलों के गांवों में ङ्क्षसचाई की सुविधा मिलती है। यह नहर कोटा व बारां जिले से होकर मध्यप्रदेश के बड़ौदा, श्योपुर जिले में पहुंचती है। बारां जिले में कृषि योग्य क्षेत्रफल 3.45 लाख हैक्टेयर है।
कई स्रोतों की अरसे
से नहीं ली सुध
जिले के कई छोटे तालाबों के जलसंग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण होने से क्षमता के अनुरूप जल संग्रहण नहीं होता। जबकि कुछ बांधों को मरम्मत की दरकार है। इनदिनों अहमदी लघु ङ्क्षसचाई परियोजना का अच्चतम जल भराव क्षेत्र के ऊपरी हिस्से में पिङ्क्षचग का कार्य चल रहा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर आवश्यकता अनुसार मरम्मत कार्य कराया जाता है।
& जिले में अभी मानसून सक्रिय नहीं हुआ है, इससे बांध व तालाबों में पानी की आवक नहीं हो रही। अभी नदियों में पानी की आवक नहीं होने से लिफ्ट परियोजनाओं को शुरू नहीं किया जा सकता। बांध व तालाबों की हालत सही है।
नीरज अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग, बारां
ङ्क्षसचाई स्रोत भराव क्षमता वर्तमान भराव
गोपालपुरा 8.15 मीटर 2.74 मीटर
बैथली 9.60 मीटर 4.20 मीटर
बिलास 8.10 मीटर 3.15 मीटर
उम्मेदसागर 10.07 मीटर 6.55 मीटर
इकलेरा सागर 5.79 मीटर 1.98 मीटर
रातई 6.10 मीटर 0.00
कालीसोत 5.18 मीटर 0.00
छत्रपुरा 3.51 मीटर 0.00
उतावली 5.16 मीटर 2.41 मीटर
ल्हासी 6.00 मीटर 3.40 मीटर
खटका 4.28 मीटर 0.00
नारायणखेड़ा 5.16 मीटर 0.00
महोदरी 3.51 मीटर 0.00
नाहरगढ़ 2.44मीटर 0.00
फलिया 6.02 मीटर 0.22
सेमलीफाटक 5.00 मीटर 0.00
खिरिया 6.00 मीटर 0.00
अहमदी 2.81 मीटर 0.75 मीटर
(स्रोत-जल संसाधन विभाग बारां)