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प्री मानसून का असर : नदियों में पानी की आवक, चादर चली

एक दिन की बारिश से नदियों को मिला जीवन

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बारां

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Mukesh Gaur

Jun 15, 2022

प्री मानसून का असर : नदियों में पानी की आवक, चादर चली

प्री मानसून का असर : नदियों में पानी की आवक, चादर चली

जलवाड़ा. कस्बे सहित क्षेत्रीय अंचल में मंगलवार को ढाई घंटे तक बारिश होने से नदियों में पानी की आवक बढ़ गई। कदीली, लाठखेड़ा, बालापुरा, किशनपुरा, बजरंगगढ़, खल्दा सहित अन्य गांवों में बारिश से उतावली नदी, बरनी नदी की पुलिया व सुखार नदी की रपट पर चादर चलने लगी। पार्वती नदी में भी पानी की आवक हुई है। जिले के कई स्थानों पर सोमवार रात को बदले मौसम के बाद बूंदाबांदी और बारिश होने से मंगलवार सुबह तक ठंडक बनी रही। इसके बाद में जैसे ही धूप निकली, गर्मी और उमस बढ़ गई। अधिकतम तापमान &9 डिग्री और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस रहा। हवा में आद्र्रता का प्रतिशत &7 रहा। इस दौरान हवा की अधिकतम गति &1 डिग्री मापी गई। शाम को जिले के गऊघाट और आसपास के गांवों में बारिश हुई है। इससे सड़कें गीली हो गई, लोगो को गर्मी से राहत मिली। सोमवार रात को आधा घंटा तेज हवा के साथ हुई से कई क'चे घरों के टीन-टप्पर उड़ गए।

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आंधी से टीन-टप्पर उड़े
छबड़ा. कड़ैयाहाट में सोमवार रात आंधी व बारिश से दर्जनों मकानों के टीन-टप्पर उड़ गए। कई दीवारें ढह गई। मंगलवार को ग्रामीणों ने प्रधान को ज्ञापन देकर नुकसान का सर्वे करवाकर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की। आंधी इतनी तेज थी कि खेतों में खड़े कई खंभे भी गिर गए। इस अंधड़ व बारिश से किसानों को नुकसान हुआ है।

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इधर, मांगरोल में पानी के लिए कर रहे रतजगा
मांगरोल. नगरपालिका क्षैत्र के कई मोहल्लों में पेयजल लाइनें नहीं डलने से लोगों को बस्ती में लगे हैंडपंपों से पानी भरना पड़ रहा है। जहां पेयजल का वितरण हो रहा है। वहां भी कम पानी आने की शिकायत लोग कर रहे हैं। सुबह पानी की ज्यादा जरूरत के चलते नल आते ही उपभोक्ता मोटरें चला लेते हैं, इससे कई उपभोक्ताओं को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। देर रात 9 बजे पानी की सप्लाई होती है। ऐसे में लोगों को देर रात तक जागना पड़ रहा है। पेयजल वितरण का समय पिछले एक माह से बदलने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।