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स्कूलों में पुरानी की सुध नहीं, खोलेंगे पैंतीस नई लैब

जिले के करीब 260 उच्च प्राथमिक स्कूलों मेंं स्थापित कम्प्यूटर लैब में से ज्यादातर स्कूलों में लैब अक्रियाशील हैं। प्रतिवर्ष नए कम्प्यूटर आ जाते हैं।

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Rajasthan School Education Council

बारां. कक्षा छठी से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर का ज्ञान देने के लिए कम्प्यूटर लैब तो खुलती जा रही है, लेकिन पुरानी लैब की तरफ ध्यान ही नहीं है। जिले के करीब 260 उच्च प्राथमिक स्कूलों मेंं स्थापित कम्प्यूटर लैब में से ज्यादातर स्कूलों में लैब अक्रियाशील हंै। प्रतिवर्ष नए कम्प्यूटर आ जाते हैं। उसके आधार पर कम्प्यूटर लैबों की शुरुआत होती जा रही है। वर्तमान में कितने स्कूलों मेें लैबें अक्रियाशील है। विभाग के पास यह आकड़ा तक नहीं है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर शिक्षा का ज्ञान देने का कार्यक्रम केवल कागजों में ही चल रहा है।
प्रारंभिक शिक्षा के अधीन जिले भर में 927 स्कूल हैं। इनमें 546 प्राथमिक व 381 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। उच्च प्राथमिक स्कूलों में कक्षा छह से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को कम्प्यूटर सिखाने के लिए वर्ष 2005 में कल्प कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। इसके तहत प्रत्येक स्कूल मेें प्रतिवर्ष कम्प्यूटर भेजे जाते हैं। किसी स्कूल में 2 तो किसी स्कूल में 3 कम्प्यूटर भेजकर कल्प लैब की स्थापना की जाती है। अब लैबों की संख्या बढ़ते-बढ़ते करीब 260 हो गई है। गत वर्ष भी 10 स्कूलों में कम्प्यूटर लैब की शुरुआत की गई थी। समग्र शिक्षा अभियान के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिवर्ष लैब की शुरुआत के पीछे शिक्षा विभाग का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को डिजीटल तकनीक का ज्ञान देना है।
कल्प कार्यक्रम के तहत मांगे प्रस्ताव
इस वर्ष भी कल्प कार्यक्रम के तहत 35 स्कूलों में नई लैब शुरू कराने के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। उक्त कार्यक्रम के तहत यहां पर कम्प्यूटर, बैटरियां व प्रिंटर उपलब्ध कराए जाएंगे, लेकिन इसमें उत्कृष्ट स्कूलों को प्राथमिका दी जाएगी। यदि उत्कृष्ट स्कूल नहीं होंगे तो अन्य स्कूलों में लैब खोली जाएगी। ये लैबें उन स्कूलों में खोली जाएगी, जहां पर छात्र-छात्राओं का नामांकन कम से कम 100 होना चाहिए। साथ ही उक्त स्कूलों में लैब स्थापित करने के लिए अतिरिक्त कक्ष, इंटरनेट व बिजली होना आवश्यक है।
सर्वे कराया जाएगा
कल्प कार्यक्रम की शुरुआत 2005 मेें हुई थी। बजट व नए कम्प्यूटर नहीं आने से कई स्कूलों में लैबे अक्रियाशील हो गई है। स्कूलों में अक्रियाशील लैबों का पता करने के लिए सर्वे कराया जाएगा। फिर उसके बाद व्यक्तिगत रूप से उक्त लैबों को शुरू कराने के बजट मांगा जाएगा या फिर लैब को शुरू कराने के लिए जनसहयोग जुटाया जाएगा और विभाग के जनसहयोग जुटाने के प्रयास परवान नहीं चढ़ते।
रखरखाव व नए कम्प्यूटर नहीं आने से ज्यादातर स्कूलों में कल्प लैब अक्रियाशील हो गई हैं। नए कम्प्यूटर भेजने व रखरखाव का बजट देने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।
चंद्रशेखर जाटव, कार्यक्रम अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान