मांगरोल. यह धनुष किेसने तोड़ा है, वह मेरे काल का ग्रास बनेगा। शिवजी के धनुष को मेरे आने से पहले ही भंग कर देने वाला ऐसा यौद्धा कौन है। यहां एतिहासिक कुंज चैक पर चल रही ढ़ाई कड़ी दोहे की रामलीला में गुरुवार की रात ऐसे ²श्यों का मंचन किया जो किसी फिल्म की शूटिंग से कमतर नहीं लग रहे थे। पहले शंकर भगवान के दरबार में रावण का तांडव नृत्य और उसके बाद मिथिला के राजा जनक द्वारा विभिन्न राजाओं को सीता स्वंयवर का आमंत्रण, इससे पहले सीता माता का मां अंबे गौरी का पालकी में बैठकर पूजन करने जाना, राजाओं का आगमन व अनेक राजाओं का धनुष उठाने में असफल होना राम के धनुष उठाने व उसके बाद कुपित हुए परशुराम व राजाओं द्वारा उन्हें मनाने व लक्ष्मण के अनुनय विनय करने के बाद परशुराम का क्रोध शांत होने की लीला का सजीव चित्रण किया गया।धनुष यज्ञ की लीला देखने बड़ी संख्या में श्रद्वालुजन देर रात दो बजे तक डटे रहे। रामलीला से पहले भगवान शंकर की झांकी सजाई जिसकी हरिओम शर्मा,जगदीश वैद्य व सत्यनारायण गौतम ने पूजन अर्चन कर आरती उतारी। रामलीला के तीसरे दिन यहां रामबारात निकाली गयी जिसमें राम लखन समेत विभिन्न झांकियां निकाली गई।