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राम के क्रोध से भयभीत हुआ सागर

सागर तट पर भगवान शिव की स्थापना एवं आराधना कर श्रीराम ने नल-नील नामक वानरों की सहायता से सेतु बांध सागर पार कर लंका

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रामलीला मंचन जारी
रामेश्वर की स्थापना के बाद लंका पहुंचे भगवान राम
बारां. शहर के प्रताप चौक स्थित रामलीला मैदान में नगर परिषद व जन सहयोग से श्रीमहावीर कला मण्डल संस्थान द्वारा आयोजित रामलीला में बुधवार को रामेश्वर स्थापना, अंगद रावण संवाद की लीला का मंचन किया गया। सागर तट पर भगवान शिव की स्थापना एवं आराधना कर श्रीराम ने नल-नील नामक वानरों की सहायता से सेतु बांधा और वानर सेना के साथ सागर पार कर लंका पहुंचे। सीता की सुधि मिलने के बाद श्रीराम वानर सेना को लेकर सागर तट पर पहुंचे और विनय पूर्वक सागर से रास्ता मांगा। कई दिन बीत जाने के बाद भी रास्ता नहीं मिलने पर श्रीराम क्रोधित होकर धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं। जिससे सागर भयभीत होकर कहता है कि ‘हे राघव दीन जान मुझको, मुझ पर प्रभु कृपा आप कीजे’। समुद्र का मान मर्दन नहीं करने की सलाह देते हुए श्रीराम से कहते है कि नल-नील नाम के दो वानर ऐसे हैं, जिन्हें लरकाई ऋषि का श्राप है कि वे पत्थर को क्या पर्वत को भी पानी में डालेगे तो वह डुबेगा नहीं। उनके हाथों समुद्र में पत्थर डालकर सेतु बनाया जा सकता है। जिससे समुद्र की मर्यादा भी रहेगी और सागर पार भी किया जा सकेगा। श्रीराम सागर की विनय मानकर समुद्र तट पर शिव की स्थापना कर पूजा-अर्चना करते हैं और सेतु निर्माण कर सेना सहित सागर पार पहुंच जाते हैं। युद्ध के शंखनाद से एकबार फिर वानरसुत युवराज अंगद को सन्धि प्रस्ताव लेकर लंका में भेजा जाता है। जहां रावण-अंगद के बीच तीखी तकरार हुई और रावण सन्धि की बात को स्वीकार नहीं करता। अंगद आवेश में आकर रावण को चुनौती देता है कि यदि लंका का कोई भी वीर उसके पैर को जमीन से उठा दे तो श्रीराम सीता को हार जाएंगे। लंका के सभी वीर यौद्धा अंगद का पैर उठाने का प्रयास करते हैं, इनके सफल नहीं होने पर पहले मेघनाथ, अन्त में रावण स्वयं पैर उठाने का प्रयास करता है तो अंगद उसी समय पैर हटा कर रावण को सलाह देता है कि अंगद के पैर पकडऩे से कुछ हासिल नहीं होगा। यदि वह श्रीराम के चरणों की शरण में जावेगा तो पूरे कुल का उद्धार हो जाण्गा। बहुत समझाने के बाद भी रावण नहीं समझता है तो अंगद युद्ध का ऐलान कर कूच कर जाते है। संस्थान के अध्यक्ष योगेश गुप्ता ने बताया कि रामलीला में दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है।
अन्ता. कस्बे के गढ़ परिसर में श्रीराम कला मंडल द्वारा आयोजित रामलीला में बुधवार की रात भगवान राम द्वारा लंका मार्ग पर सेतू बनाने के लिए रामेश्वर स्थापना, विभीषण शरणागति आदि प्रसंगों का मंचन किया गया। इस दौरान अंगद द्वारा भरी सभा में रावण को उनका एक पांव उठाने की चुनौती दी गई तो रामलीला देख रहे श्रद्धालु जोश में आकर भगवान राम के जयकारे लगाने लगे। रामलीला समिति के पूर्व अध्यक्ष धनराज चौरसिया ने बताया कि शुक्रवार को भगवान राम द्वारा अपनी सेना के साथ रावण दहन स्थल पर महाबली रावण के पुतले का वध करने के बाद रंगमंच पर राम के राज्याभिषेक से रामलीला का समापन किया जाएगा।
समाचार - हंसराज शर्मा द्वारा