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विश्व क्षितिज पर चमकेगा बारां का रामगढ़, 2020 में दुनिया भर के विशेषज्ञ आएंगे ,राष्ट्रीय भू धरोहर बनेगा

भारत की पहली व बड़ी भू- विरासत सम्पदा घोषित रामगढ़ क्रेटर का दुनिया भर के भू-विशेषज्ञ व वैज्ञानिक सर्वे करेंगे।

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विश्व क्षितिज पर चमकेगा बारां का रामगढ़, 2020 में दुनिया भर के विशेषज्ञ आएंगे ,राष्ट्रीय भू धरोहर बनेगा

ramgarh

बारां. दिल्ली में मार्च 2020 में होने वाली इंटरनेशनल जियोलॉजी कांग्रेस के बाद रामगढ़ दुनिया भर में चमकेगा। भारत की पहली व बड़ी भू- विरासत सम्पदा घोषित रामगढ़ क्रेटर का दुनिया भर के भू-विशेषज्ञ व वैज्ञानिक सर्वे करेंगे। रामगढ़ क्रेटर को राष्ट्रीय भू धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा, इससे इसे देश के साथ विदेशों में भी पहचान और पर्यटन को बढ़ावा मिल सकेगा। रामगढ़ में ं म्युजियम व सूचना केन्द्र भी बनाया जाएगा। वहां के्रेटर के अवशेष व वैज्ञानिक तत्वों को रखा जाएगा। संग्रहालय में के्रटर के निर्माण सम्बंधी पूरी जानकारी के लिए उल्का पिंड से गिरी पत्र-पत्रिकाएं रखी जाएंगी।
यह बात जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया व केन्द्रीय कार्यालय इन्टेक के क्रेटर विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय टीम ने यहां पत्रकारों से चर्चा में कही। टीम को सर्वे के लिए भारतीय भू सर्वेक्षण विभाग की ओर से जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीम सदस्यों ने शुक्रवार को रामगढ़ का सर्वे भी किया। टीम सदस्य प्रोफेसर एन.के चौहान का कहना है कि यहां पर लाखों साल पहले उल्का पिंड गिरा था। इससे चार किलोमीटर व्यास का गड्ढा बन गया। आसपास पहाड़ी बन गई लेकिन उक्त स्थान का महत्व लोगों को पता नहीं है। वर्तमान में इसकी पहचान सांस्कृतिक व आध्यात्मिक दृष्टि से है। यहां खुजराहो शैली पर आधारित 10वीं सदी का शिवमंदिर है। रामगढ़ पहाडिय़ों पर प्राकृतिक गुफा में किसनाई व अन्नपूर्णा देवी का मंदिर है। कार्तिक पूर्णिमा पर मेला भी आयोजित किया जाता है। सन् 1971 में झाला जालिम सिंह ने लगभग 750 सीढिय़ां मंदिर पहुंचने के लिए बनाई थी।
1965 में हुआ था चयन
डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह राणावत ने बताया कि क्रेटर का चयन 1965 में भारतीय भू वैज्ञानिक विभाग ने किया था। भू धरोहर विकसित करने के लिए पूर्व में प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था। एक माह में रिपोर्ट भी सौंप दी जाएगी। स्वीकृति मिलते ही निर्माण के लिए जिला कलक्टर से दो हैक्टेयर जमीन मांगी जाएगी। साथ ही सरकार से प्रस्ताव भी मांगा जाएगा, जिससे यहां पर म्युजियम व सूचना केन्द्र को विकसित किया जा सके।
यह भी है विशेषता
पहली बार इसे 1869 में भारत के भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षक मलेट ने देखा था। विश्व की सबसे बड़ी डिक्शनरी एनसाइक्लोपीडिय़ा पर भी रामगढ़ के्रटर की जानकारी उपलब्ध है। यह 3.2 किमी (एनसाइक्लोपीडिया के अनुसार) व्यास के आकार का है। उदयपुर सुखाडिय़ा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विनोद अग्रवाल ने बताया कि उल्का पिंड गिरने की घटना भारत में तीन जगहा पर हुई थी। इनमें महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा व मध्यप्रदेश के शिवपुरी में ढाला शामिल है।
इन नामों से मिली पहचान
रामगढ़ के्रटर को रामगढ़ संरचना, रामगढ़ मेटियोरिकेटिक संरचना, रामगढ़ रिंग स्ट्रक्चर, रामगढ़ डोम, रामगढ़ गुंबद (डाम) संरचना, रामगढ़ अस्त्रोबले आदि नामों से भी जाना जाता है।