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आरजीएचएस योजना में जिले के दवा विक्रेताओं के दस करोड़ रुपए अटके

कई कर्मचारियों और पेंशनरों को दवा लेने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है। इससे पेंशनरों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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बारां

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Mukesh Gaur

Sep 16, 2024

कई कर्मचारियों और पेंशनरों को दवा लेने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है। इससे पेंशनरों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कई कर्मचारियों और पेंशनरों को दवा लेने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है। इससे पेंशनरों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कुछ दे रहे तो कुछ दे रहे अधूरी, पेंशनर्स और कर्मचारियों को परेशानी

बारां. आरजीएचएस योजना के तहत भुगतान नहीं होने से दवा विक्रेताओं का बकाया बढ़ता जा रहा है। इससे कई दवा विक्रेताओं ने तो योजना के तहत अनुबंधित होने के बावजूद दवा देना बंद कर दिया और कुछ आधी अधूरी दवा देकर काम चला रहे हैं। कर्मचारी और पेंशनर मेडिकल स्टोरों के चक्कर लगा रहे है। कई कर्मचारियों और पेंशनरों को दवा लेने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है। इससे पेंशनरों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। जिले में दवा विक्रेताओं का अनुमानित दस करोड़ का भुगतान रुका हुआ है।

हड़ताल के साथ बिक्री

सूत्रों का कहना है कि प्रदेश की मई माह से दवा विक्रेताओं को आरजीएचएस योजना के तहत भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे दवा विक्रेताओं को बकाया भुगतान बढ़ता रहा है। इस मामले को लेकर दवा विक्रेताओं की प्रदेश स्तर पर सरकार से वार्ता हुई थी, लेकिन अब तक भुगतान नहीं किया गया। बाद में 10 अगस्त से हड़ताल शुरू की गई। जिले में भी दवा विक्रेताओं ने हड़ताल करते हुए मेडिकल स्टोरों पर पर्चे चस्पा कर दिए थे। इसमें आरजीएचएस योजना के तहत समस्याओं के सम्पूर्ण एवं प्रभावी समाधान तक दवा देने में असमर्थता जताते हुए सहयोग की अपील की गई थी। बाद में कुछ दवा विक्रेताओं ने दवा देना शुरू कर दिया। पर्चे अभी भी कुछ अधिकृत मेडिकल स्टोर पर चस्पा है। अब कुछ दे रहे हैं तो कुछ बेरंग लौटा रहे है। आयुर्वेद दवाओं के मामले में भी दवा विक्रेताओं का इसी तरह का रवैया है।

दवा विक्रेता हुए तंग

पेंशनर्स और कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से उनके वेतन में से नियमानुसार राशि की कटौती तो की जा रही है। फिर दवा विक्रेताओं को भुगतान भी करना चाहिए। सरकार और दवा विक्रेताओं के आपसी मामले में पेंशनर्स ओर कर्मचारियों को लाभ से वंचित किया जाना उचित नहीं है। वहीं, अधिक बकाया होने से होलसेल दवा विक्रेताओं ने हाथ खींच लिए है। इससे भी दवा विक्रेताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मेडिकल स्टोर से दवा नहीं मिल रही है। नकद खरीदना पड़ रहा है। गंभीर बीमार कर्मचारियों जिनको
5-10 हजार रुपए महीने की दवा लेनी पड़ती है, उन्हें आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में संगठन की ओर से सरकार को अवगत कराया गया था।

श्याम बाबू मेहता, जिला संयोजक, शिक्षक संघ राष्ट्रीय

वर्तमान में चिकित्सक की ओर से पर्ची पर लिखी जा रही दवाइयां नहीं मिल रही है। कुछ दिनों से अधिक समस्या आ रही है। इससे पेंशनर्स में आक्रोश है। दवा विक्रेताओं की ओर से बकाया भुगतान की बात कही जा रही है। सरकार को नियमानुसार बकाया भुगतान कर समाधान करना चाहिए। इस मामले में संभाग स्तर पर ज्ञापन भी दिया गया था।

दिनेशचन्द गुप्ता, जिला अध्यक्ष पेंशनर्स समाज

योजना के तहत 21 दिन में भुगतान होना था, लेकिन करीब 5 महिनों से भुगतान नहीं हो रहा है। कुछ दवा विक्रेताओं के 20-30 लाख तक बकाया हो गया। कई बिलों को रिजेक्ट किया जा रहा है। इससे भी काफी बिलों को भुगतान फंसा हुआ है। प्रदेश स्तर पर सरकार से वार्ता हुई, फिर हड़ताल शुरू हो गई। यहां दवा तो दी जा रही है, लेकिन पहले जैसी पूर्ण दवा नहीं दी जा रही है। जिले में अनुमानित दस करोड़ का भुगतान बकाया है।

कृष्ण शर्मा, वरिष्ठ सदस्य, आरजीएचएस दवा विक्रेता समिति