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इन गांवों को सड़क और लोगों को सुगम राह का इंतजार

सड़क की कमी से अब तक आवागमन से कटे हैं कई गांव

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बारां

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Mukesh Gaur

Nov 23, 2021

इन गांवों को सड़क और लोगों को सुगम राह का इंतजार

इन गांवों को सड़क और लोगों को सुगम राह का इंतजार

जलवाड़ा. आजादी के बाद से अब तक भी क्षेत्र के आधा दर्जन गांवो के बाशिंदों को पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है। बरसात में कच्ची डगर से गुजरना मुश्किल भरा अनुभव होता है। जन्मझिरी गांव का मार्ग कच्चा होने से बारिश में लोगों को छत्रगंज व नाहरगढ़ कस्बे में आवश्यक खरीददारी करने सहित अन्य कार्यो के लिए जाने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

गांव में यदि कोई बीमार हो जाये तो ऊबड़-खाबड़ रास्तों से या चारपाई व अन्य साधनों से लाना पड़ता है। कई बार खाळ में अधिक पानी होने से कस्बे में रोगी को नहीं ले जा पाते हैं। ऐसे में रोगी की जान पर बन आती है। यहां से विद्यार्थी पढने के लिए छत्रगंज या नेहरूपुरा जाते हैं। यहां दोनों ओर कच्चा रास्ता है। यह गांव पशुपालकों का है। यहां 7 हजार से अधिक मवेशी है। पशुओं के बीमार होने पर तो और परेशानी हो जाती है।

कुछ ऐसे ही हालात जलवाड़ा के राड़ी मार्ग के हैं। इस मार्ग पर 2003 से करीब तीन बार गेवल डालने के साथ ही राड़ी के हनुमान मंदिर तक 5 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत ने मुरम डलवाई थी। उसके बाद से निर्माण कार्य अधूरा है। इस मार्ग पर दर्जनों खातेदार हैं। जिनके खेत हैं। खातेदारों को बरसात में खेतों की हंकाई-जुताई तथा बुवाई के लिए ट्रैक्टरों को ले जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस मार्ग पर राड़ी में प्राचीन हनुमान मंदिर है। यहां हर मंगलवार व शनिवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

इधर भी है कच्ची डगर
क्षेत्र के खल्दा से किशनपुरा गांव के अलावा ख्यावदा से अहमदी, अहमदा से हरिपुरा, मालौटी से हरिपुरा, छत्रगंज से परानिया का कच्चा रास्ता होने से लोगों को बारिशमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जितेन्द्र गौड़ के अनुसार अटरू उप खण्ड के पिपलोद रेलवे स्टेशन से बगली गांव तक भी करीब तीन किलोमीटर का मार्ग भी कच्चा है। लोगों को बारां, कोटा, कवाई, छबड़ा व अन्य स्थानों पर जाने के लिए पिपलोद रेलवे स्टेशन तक पहुंचना टेढ़ी खीर साबित होता है। चरड़ाना से बगली तक की डगर भी कच्ची ही है। पार्वती केनाल के निकट बसे पतलिया गांव तक के बाशिंदों को भी पिपलोद व गोविन्दपुरा गांव जाने के लिए भी ग्रामीणों को कच्चे रास्तों से होकर ही गुजरना पड़ता है।

वन विभाग ने रुकवाया निर्माण कार्य
जन्मझिरी से नेहरूपुरा गांव तक रोड़ का निर्माण कार्य शुरू हो गया था। इससे गांव के लौगो को उम्मीद बंधी थी कि अब पक्की सड़क बनने से बारिश में समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। बलदेव गुर्जर ने बताया कि वन विभाग ने रोड का निर्माण कार्य वनभूमि पर होने की बात कह कर बंद करवा दिया। जिससे लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।