17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

4 करोड़ से होगा शाहाबाद और सोरसन कन्जर्वेशन का विकास

वन विभाग ने जिले के वन क्षेत्र शाहाबाद व सोरसन में बेस ऑग्यूमेंटेशन एनक्लोजर निर्माण कार्य को लेकर चार करोड़ रुपए के प्रस्ताव मुख्य वन संरक्षक कोटा को भिजवाए है। इस राशि से विकास कार्य कराए जाएंगे।

2 min read
Google source verification

बारां

image

Mukesh Gaur

Mar 17, 2025

वन विभाग ने जिले के वन क्षेत्र शाहाबाद व सोरसन में बेस ऑग्यूमेंटेशन एनक्लोजर निर्माण कार्य को लेकर चार करोड़ रुपए के प्रस्ताव मुख्य वन संरक्षक कोटा को भिजवाए है। इस राशि से विकास कार्य कराए जाएंगे।

वन विभाग ने जिले के वन क्षेत्र शाहाबाद व सोरसन में बेस ऑग्यूमेंटेशन एनक्लोजर निर्माण कार्य को लेकर चार करोड़ रुपए के प्रस्ताव मुख्य वन संरक्षक कोटा को भिजवाए है। इस राशि से विकास कार्य कराए जाएंगे।

विभाग को भेजे प्रस्ताव, मंजूरी मिलते ही कराएंगे कई कार्य

बारां. वन विभाग ने जिले के वन क्षेत्र शाहाबाद व सोरसन में बेस ऑग्यूमेंटेशन एनक्लोजर निर्माण कार्य को लेकर चार करोड़ रुपए के प्रस्ताव मुख्य वन संरक्षक कोटा को भिजवाए है। इस राशि से विकास कार्य कराए जाएंगे। शाहाबाद व सोरसन अभयारण्य को विकसित करने के लिए तथा क्षेत्रों में पैंथर एवं अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए दोनों क्षेत्रों में 12 फीट की उंचाई की फेंङ्क्षसग, पीसीसी दो करोड़ 48 लाख की लागत, एक करोड़ 32 लाख की लागत से तलाई, वाटरहॉल, ट्रैङ्क्षकगपाथ, मेडिकल सुविधाएं, मुख्य प्रवेशद्वार, सोलर पेनल व पाइप लाइन, ग्रासलैण्ड का विकास, सप्लीमेन्ट फूड उपलब्ध करवाना, कैमरे, वॉच एण्ड वार्ड समेत कई तरह के कार्य करवाए जाएंगे।

2.18 लाख हैक्टेयर में फैला है वनक्षेत्र

जिले में कुल 2.18 लाख हैक्टेयर में वनक्षेत्र मौजूद है। वन मंडल के अंतर्गत आने वाले शाहाबाद कन्जर्वेशन रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 18939.61 हैक्टेयर हैं। जो रेंज शाहाबाद के अंतर्गत आता है। शाहाबाद कन्जर्वेशन रिजर्व को जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वर्ष 2021 में कन्जर्वेशन रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था। यह क्षेत्र शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना जिलों से घिरा हुआ है। वहीं यह शिवपुरी के के माधव राष्ट्रीय उद्यान एवं कूनो नेशनल पार्क के निकट है। इससे यह वन्यजीवों के पारंपरिक प्रवास मार्ग का हिस्सा बनता है। इस क्षेत्र के निकटवर्ती गांवों में शादाबाद, गोपालपुरा, मंडावरा, सेमलपुरा, बांसखेड़ा, गिरधरपुर, डांगश, डोब, पटपड़ा, पाटन और डोलपुरा शामिल हैं।

वन्यजीवों की बहुलता

इस क्षेत्र में पैंथर, चीतल, नीलगाय, सांभर, लोमड़ी, सियार, जंगली बिल्ली, खरगोश, जरख, साही तथा विभिन्न प्रकार के सर्प एवं पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र कभी शिकारगाह के रूप में प्रसिद्ध रहा है। यहां कभी बाघों की मौजूदगी थी, जो 1961 के बाद समाप्त हो गई। वर्तमान में यहां के कुंडाखोह क्षेत्र में पैंथर का बार-बार दिखना एक सकारात्मक संकेत है। इससे इस क्षेत्र को पुन: बाघ भूमि के रूप में विकसित करने की संभावना बनती है। यहां कूनो नेशनल पार्क से निकले चीतों का भी विचरण देखा गया है।

जैविक-भौगोलिक महत्व

वन मंडल के अंतर्गत आने वाले सोरसन कन्जर्वेशन रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 1610.73 हैक्टेयर है। सोरसन कन्जर्वेशन रिजर्व को पारिस्थितिक, जैविक एवं भौगोलिक महत्व तथा संरक्षण योग्य प्रजातियों के लिए उपलब्ध आवास को ध्यान में रखते हुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 36 के प्रावधानों के तहत अधिसूचित किया गया था। इसके अधिसूचित होने से पूर्व यह क्षेत्र आरक्षित और अवर्गीकृत वन खंडों के मिश्रण के रूप में प्रबंधित किया जाता था। अब इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 तथा उसके संशोधनों के प्रावधानों के अनुसार एक संरक्षित क्षेत्र के रूप में प्रबंधित किया जाएगा।

कई जीवों का बसेरा

सोरसन कन्जर्वेशन रिजर्व मुख्य रूप से विशाल घास के मैदान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। जो काले हिरण और विभिन्न स्थानीय एवं प्रवासी पक्षी प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास है। यह रिजर्व राजस्थान के संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में पारिस्थितिक जुड़ाव बनाए रखने में सहायक है। जो आसपास के संरक्षण परि²श्यों को जोड़ता है और वन्यजीव प्रजातियों के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में कई आद्र्रभूमियों और मौसमी जल निकाय मौजूद हैं। जो जलआश्रित प्रजातियों के मुफीद हैं। इस क्षेत्र में पैंथर, चीतल, नीलगाय, सांभर, लोमड़ी, सियार, जंगली बिल्ली, खरगोश, जरख, साही तथा विभिन्न प्रकार के सर्प एवं पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।