
श्रीजी के संग खेली फूलों की होली, हवा में बिखरे उमंग और उल्लास के रंग
बारां शहर समेत जिले भर में उत्साह, उमंग ओर हर्षोल्लास के साथ होली का दो दिवसीय त्योहार मनाया गया। जगह-जगह होलिका दहन किया गया। सार्वजनिक उत्सव समारोह की ओर से श्रीजी चौक पर तथा दीनदयाल पार्क क्षेत्र में भारत विकास परिषद की ओर से सामाजिक बुराईयों की होली जलाई गई। इसके अलावा शहर में इन्दिरा मार्केट, कोटा रोड, अस्पताल रोड, मांगरोल रोड, तेलफैक्ट्री क्षेत्र, शिवाजी कॉलोनी, अटरू रोड, लंका कॉलोनी आदि विभिन्न इलाकों में पूजा अर्चना के साथ होलिका दहन किया गया। इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के तहत पर्याप्त बंदोबस्त किए गए थे। पुलिस अधीक्षक राजकुमार चौधरी प्रताप चौक पुलिस चौकी पर रहकर जिलेभर की स्थिति पर निगाह रखे हुए थे।
कवि सम्मेलन को नहीं मिली अनुमति
शहर में धुलण्डी के दिन रात के समय लम्बे समय से महावीर कला मंडल संस्थान के हास्य क्लब की ओर से महामुर्ख कवि सम्मेलन आयोजन की परम्परा रही है, लेकिन इस वर्ष यह सम्मेलन नहीं होने से लोगों को खासी निराशा रही। क्लब के पदाधिकारी योगेश गुप्ता ने बताया कि कवि सम्मेलन के लिए अनुमति मांगी गई थी, लेकिन तेलफैक्ट्री आरओबी निर्माण के चलते प्रताप चौक पर यातयात का दबाव होने तथा परीक्षाओं के चलते प्रशासन की ओर से प्रताप चौक पर महामुर्ख हास्य कवि सम्मेलन के लिए अनुमति नहीं दी गई। मेहर समाज ने भगवान श्री चतुर्भुज नाथ जी महाराज मेहर समाज मन्डोला वार्ड के मंदिर पर फूलों व गुलाल से होली खेलकर एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं दी। आदर्श मेहर समाज सेवा संस्थान के अध्यक्ष नरेंद्र मेहरा ने बताया कि इस अवसर पर सुरेश कुमार वर्मा, संजय ङ्क्षसधिया, अशोक मेहरा, घनश्याम मेहरा, हेमराज केसवालिया, संजय, महावीर, महेन्द्र मेहरा, नरेन्द्र मेहरा, जितेंद्र मेहरा, कृष्ण मुरारी मेहरा आदि मौजूद रहे।
ढूंढ उत्सव के साथ ढाई कड़ी दोहे की रामलीला की तैयारी
मांगरोल में चैत्र सुदी प्रतिपदा से होने वाली ढाई कड़ी दोहे की रामलीला के मंचन की तैयारियां धुलंडी के दिन मनाए गए ढूंढ उत्सव के साथ ही शुरु हो गई। पौराणिक परंपरा के अनुसार धुलंडी के दिन रंगों से होली खेलने के साथ ही यहां कुंज चौक पर होने वाली रामलीला के कलाकार ढोलक हारमोनियम लेकर उन परिवारों में जाते हैं, जहां बीते एक बरस के दौरान संतान का जन्म हुआ हो। वहां रामलीला की ढाई कड़ी दोहे की चौपाईयों के साथ बधाई जैसे दशरथ घर जन्म्या राम..बधाई गाओ रे. गीत गाते हैं। परिवार वाले घर आए कलाकारों को पकवान खिलाते हैं। बख्शीश रुपी चंदा देते हैं। इसे ही ढ़ूंढ उत्सव का नाम दिया गया है। इस बख्शीश में दिए गए चंदे की राशि से ही यहां रामलीला होती आई है। सोमवार को यहां लगभग आधा दर्जन घरों में कलाकारों ने जाकर ढोलक मंजीरे के साथ गीत गाए व परिवारजनों ने उन्हें मनमाफिक चंदा दिया। ढाई कड़ी दोहे की रामलीला के कलाकार भांड बने तो जिनके घर बधाइयां गाई उन्हें राजा दशरथ की पदवी से नवाजा और पुत्र को राम के सद्व्रश बता बधाई की बख्शीश ग्रहण की। हालांकि अब बदलते दौर के साथ खर्च बढ़़ गया। ऐसे में आयोजकों को अन्य स्त्रोंतों से भी रामलीला आयोजन के लिए राशि जुटानी पड़ती है। लेकिन लगभग डेढ़ सदी से चल रही यह परंपरा आज भी कायम है।
चंग की धुन पर बंजारा समाज के लोग गा रहे होली के रसिया
कवाई क्षेत्र की केरवालिया ग्राम पंचायत के अर्तगत आने वाले नरङ्क्षसहपुरा गांव में बंजारा समाज के लोग आज भी पुरानी संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं। समाज के लोगों द्वारा पौराणिक समय से ही यहां होली के पर्व पर तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन किया जाता है। इसमें चंग की धुन पर समाज की महिला व पुरुष होली के रसिया गाते हुए एक दूसरे पर रंग गुलाल उड़ाते हैं। नरङ्क्षसहपुर निवासी राजमल बंजारा ने बताया कि होली के पावन पर्व पर बंजारा समाज के लोग समूह में रसिया गायन करते है एव कई तरह के आयोजन करते है। यह आयोजन गांव के बीच स्थित नरङ्क्षसह मंदिर में किया जाता है। जो तीनों दिन तीन- तीन घंटे का होता है। होली के पर्व पर रविवार को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक तक चले इस कार्यक्रम में समाज के बंधुओं की टोली ने चंग की धुन पर 3 घंटे तक रसिया गायन किया एवं आपस में एक दूसरे पर रंग गुलाल लगाकर होली की बधाइयां दी। इस कार्यक्रम को चंग होली रसिया के नाम से आयोजन करते हैं। युवा पीढ़ी भी अपने परिवार के लोगों के साथ ही इस परम्परा में हिस्सा लेने लगी है। गांव के लोगों का कहना है की मकर संक्रांति पर भी गांव में महिलाओं द्वारा बूंदी जोड़ कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसमें महिलाएं एक दूसरे का हाथ पकड़ नृत्य करती हैं।
Published on:
26 Mar 2024 11:43 pm
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