
sorsan me aane
अभयारण्य में परिंदंों की चहचहाहट शुरू
अन्ता. कस्बे से 20 किलोमीटर दूर स्थित पर्यटक क्षेत्र सोरसन में इन दिनों विदेशी मेहमानों के आने का सिलसिला जारी है। यहां नजर आ रहे कई तरह के आकर्षक मेहमान पर्यटक नहीं बल्कि परिंदे हैं। यह हर साल यहां स्थित नियाना की तलाई में अठखेलियां करने आते हैं। इनमें से हेडेड गीजे पक्षी तो ऐसा है जो हवाई जहाज से भी ऊंची उड़ान भरता है। यह पक्षी सिर्फ शरद में ही यहां आते हैं। सात समुन्द्र पार से हजारों किलोमीटर दूर का रास्ता उडक़र तय करने वाले इन परिंदों के नाम भी विदेशी तर्ज पर हैं। जैसे ग्रेजलफाइल, फ्लेमिंगो, पेलिकन्स, बार हेडेड गीज, ग्रे लेग गीज, रूडी शेलडक़, पोचार्ड, टीलस, पेटेंट स्टार्क, स्पून बिल, कॉमन क्रेन आदि-आदि। हालांकि लम्बी दूरी तय कर यहां आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए यह यात्रा जोखिम भरी होती है। क्योंकि इस दौरान रास्ता भटकने, भोजन की कमी आदि परेशानियों से इन परिंदों को जूझना पड़ता है। ऐसे में कई बार तो इनकी जान पर बन आती है। उसके बावजूद हर परिस्थिति का सामना कर विदेशी परिंदें यहां आना नहीं छोड़ते। विदेशी मेहमानों की दोस्ती यहां मौजूद कई तरह के भारतीय पक्षियों से है। जो हर साल बेसब्री से इनके आने का इंतजार करते हैं। ऐसे में लगता है किअब देश विदेश के मेहमान यहां मिलकर खूब मस्ती करने के अलावा नववर्ष मनाने की तैयारी में जुटे हैं। बाहर से आए परिंदों को देखने के लिए इन दिनों कई लोग सपरिवार सोरसन अभ्यारण्य पहुंचने लगे हैं। जिससे यहां रौनक नजर आ रही है।
रोमांचकारी अनुभव के साथ ही ब्रह्माणी माता जी के दर्शन
उल्लेखनीय है कि इस अभ्यारण्य में सैंकड़ों की संख्या में कुलांचे भरते हरिणों के झुंड सहित भेडिय़ा, जरख, सियार, लोमड़ी, लंगूर, बन्दर, जंगली बिल्ली, खरगोश आदि वन्य जीवों के अलावा पक्षियों में मोर, तीतर, टिटहरी, जलमुर्गी आदि भी मौजूद हैं। जिन्हें देखना रोमांचकारी अनुभव है। वन्य जीवों को देखने के लिए वन क्षेत्र में ऊंचे टावर बनाए गए हैं। साथ ही राज्य सरकार ने सोरसन अभ्यारण्य को शिकार निशिद्ध क्षेत्र घोषित किया है। अभ्यारण्य में अमलसरा गांव के तालाब में कई प्रवासी पक्षी फरवरी तथा मार्च माह के दौरान अधिकाधिक संख्या में देखने को मिलते हैं। वहीं सोरसन ग्राम में स्थित सदियों पुराना ब्रम्हाणी माताजी का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। राजस्थान ही अपितु पूरे देश में संभवत: यह अकेला ऐसा मंदिर है जहां ब्रम्हाणी माताजी की पीठ पूजी जाती है।
रिपोर्ट - हंसराज शर्मा द्वारा
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Published on:
27 Dec 2018 08:26 pm
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