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हथेली से फिसल रहे सोयाबीन के दाने

अब चक्रवात की बरसात से किसान सांसत में, -खेतों में पक गई सोयाबीन,थ्रेसिंग का इंतजार

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हथेली से फिसल रहे सोयाबीन के दाने

हथेली से फिसल रहे सोयाबीन के दाने

बारां. इन वर्ष मानसून की दगाबाजी किसानों की उम्मीदों को जिंदा रखने के बाद फिर से धोखा देता नजर आ रहा है। इनदिनों जिले में अचानक बारिश का दौर शुरू हो जाता है, थोड़ी देर बाद धूप निकल आती है। ऐसे में व तो खेतों का गीला सूख रहा और न ही किसान फलियों की थे्रसिंग हो पा रही। अब तेज धूप निकलने के बाद पेड़ों की फलियों में लगे दानों के तड़कने की संभावना बन गई। ऐसे में किसानों को हाथ में आई उपज (जिंस) के दाने हथेली से फिसलने की आशंका बलवती हो उठी है। इसे लेकर किसान खासे चिंतित हैं।
पहले इंतजार कराया, फिर कहर बरपाया
मौसम विभाग ने जिले में गत जून माह के पहले पखवाड़े में मानसून के सक्रिय होने का पूर्वानुमान जताया था, लेकिन पूरा जून माह निकल जाने के बाद भी मानसून (कुछ क्षेत्रों को छोड़कर) सक्रिय नहीं हुआ। इस दौरान किसानों ने जैसे-तैसे सोयाबीन समेत खरीफ की अन्य फसलों की छिटपुट बुवाई की। बाद में जुलाई में मानसून के सक्रिय होने पर कृषि विभाग का खरीफ की बुवाई के लिए निर्धारित ३.३६ लाख हैक्टेयर में बुवाई हो गई। इसके बाद जिले में अतिवृष्टि ने सभी फसलों में व्यापक खराबा कर दिया। अगस्त व सितम्बर माह में भी मौसम की उथल-पुथल जारी रही। अब किसान मौसम पूरी तरह खुलने का इंतजार कर रहे हैं तो चक्रवात की बरसात ने फिर से किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया।
खरपतवार भी नष्ट नहीं कर पा रहे
किसानों के यह समय दोहरी मार वाला साबित हो रहा है। रह-रह कर बारिश का दौर जारी रहने से किसान फसलों में खराबे के बाद उगी खरपतवार को भी नष्ट नहीं कर पा रहे। किसानों का कहना है कि सोयाबीन के उत्पादन की उम्मीदें धूमिल होने के बाद अब रबी की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई के लिए चाहकर भी खेत तैयार नहीं कर पा रहे। सरसों की बुवाई के लिए १५ सितम्बर से १५ अक्टूबर तक ही अनुकूल समय होता है। लेकिन अब भी हो रही बारिश से सरसों की बुवाई भी नहीं कर पा रहे। कुछ दिन ऐसा ही मौसम रहा तो बाद में गेहूं व लहसुन की बुवाई के अलावा अन्य विकल्प समाप्त हो जाएंगे।

-अब हो रही बारिश से कुछ मुश्किलें तो होंगी, लेकिन खेतों की नमी बढऩे से रबी की सभी फसलों की बुवाई में आसानी रहेगी। कई फसलों के लिए तो किसानों को बुवाई से पूर्व पलेवा की जरूरत नहीं होगी तथा बुवाई के बाद इन फसलों का अंकुरण भी आसानी से होगा। वर्तमान में जिन क्षेत्रों में तेज बारिश हो रही है, वहां सोयाबीन का उत्पादन प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
-अतीश कुमार शर्मा, उपनिदेशक कृषि विस्तार